Rajasthan Chunav News: राजस्थान में विधानसभा चुनाव में मतदान का दिन करीब आ गया है। ऐसे में विपक्ष में बैठी भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की सत्ता पर काबिज गहलोत सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए चक्रव्यहू रचने में कामयाब होती नजर आ रही है। भाजपा विधानसभा चुनाव में हर हाल में जीत हासिल करना चाहती है और इसीलिए गहलोत सरकार को चौतरफा घेर रही है।
अशोक गहलोत से कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भी नाराजगी की खबरें आ रही हैं
बीजेपी के शीर्ष नेता एक तरफ गहलोत सरकार पर रैलियों में हमलावर हो रहे हैं तो दूसरी तरफ पार्टी संगठन ग्राउंड से लेकर सोशल मीडिया तक पर पूरी मुस्तैदी से जुटा है। पार्टी के कार्यकर्ता बिना नींद की परवाह किए बूथ स्तर तक काम में जुटे हैं। चुनाव में भगवा दल ने गहलोत को चक्रव्यूह में फंसा दिया है और जीत के लिए मजबूत किलेबंदी कर ली है।
गहलोत पर जाट विरोधी होने के आरोप
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 'काम किया है दिल से' के बैनर प्रदेशभर में लगवा चुकी है। इन बैनर और पोस्टर्स पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के ही बड़े-बड़े फोटो लगे थे लेकिन अचानक से कांग्रेस ने अपनी चुनावी रणनीति बदलकर सारे पोस्टर एक रात में बदल दिए हैं। अब कांग्रेस के नए पोस्टर्स से राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा गायब हैं और उनकी जगह राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने ले ली है। डोटासरा की तस्वीरें हटाने के पीछे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर जाट विरोधी होने का आरोप लग रहा है। पहले भी गहलोत पर जाट विरोधी या जाट नेताओं को निपटाने के आरोप लगते रहे हैं। इस वजह से गहलोत को अपनों का ही विरोध झेलना पड़ रहा है।
सचिन पायलट गुट कर रहा विरोध
अशोक गहलोत को सचिन पायलट गुट का विरोध झेलना पड़ रहा है। पूर्वी राजस्थान में सचिन पायलट के समर्थकों द्वारा अशोक गहलोत के खिलाफ खुलकर नारेबाजी की बात भी सामने आई है। पायलट के गद्दारों को..., ऐसे नारे राजस्थान में खूब सुनाई दे रहे हैं। एक कार्यक्रम में ये नारा गुर्जर समाज के युवा लगा रहे थे। राजस्थान में अशोक गहलोत के करीबी विधायक दानिश अबरार के खिलाफ यह नारा लगा था। वहीं एक बड़ा गुट पायलट के साथ है लेकिन अशोक गहलोत के खिलाफ खड़ा नजर आ रहा है।
अन्नपूर्णा योजना को लेकर गुस्सा
ग्राउंड पर लोगों में अशोक गहलोत सरकार की अन्नपूर्णा योजना के खिलाफ गुस्सा है। इस योजना में खराब गुणवत्ता और कम मात्रा में सामान लोगों तक पहुंचा। महिलाओं में इसे लेकर काफी गुस्सा है। कई वीडियो में महिलाएं साफ तौर पर इसका विरोध करती नजर आ रही हैं।
इन मुद्दों पर घिरे गहलोत
अशोक गहलोत से कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भी नाराजगी की खबरें आ रही हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि पूरे पांच साल में गहलोत ने कार्यकर्ताओं की चिंता नहीं की और वह अधिकारियों से ही घिरे रहे। यही वजह है कि कांग्रेस के गहलोत गुट के प्रत्याशी और उनके करीबी मंत्री गांवों में घुसने से पहले भगाए जा रहे हैं। हाल ही में लाल डायरी के कथित वायरल पन्नों में अशोक गहलोत के बेटे वैभव द्वारा कांग्रेस नेता से यही बात कही गई थी कि पापा अधिकारियों की ही सुनते हैं।
भाजपा की मजबूत किलेबंदी
भारतीय जनता पार्टी ने पूरी ताकत से चुनाव अभियान को कांग्रेस सरकार में भ्रष्टाचार से जो जोड़ दिया है। 'कर्ज में किसान', 'भ्रष्टाचार खुलेआम, 'अपराध बेलगाम, 'पेपरलीक से युवा परेशान, 'बहन बेटियों का अपमान' को लेकर राजस्थान की सत्ता में बैठी कांग्रेस सरकार को बीजेपी घेर रही है। वहीं भाजपा ने इस चुनाव में उत्कृष्ट बूथ प्रबंधन का उदाहरण पेश किया है। बीजेपी ने डिजिटल तंत्र को भी बूथ स्तर तक खड़ा किया। इसके तहत फेसबुक पर पार्टी के पौने तीन मिलियन फॉलोअर्स हैं जबकि ट्वीटर पर 9 लाख फॉलोअर्स हैं। पूरे प्रदेश में पार्टी के द्वारा 66 हजार वाट्सअप ग्रुप संचालित हैं। इसी प्रकार प्रदेशभर में 70 लाख वाट्सग्रुप बनाकर उसके माध्यम से लोगों को पार्टी से कनेक्ट कराया। सात संभाग में आधुनिक कॉल सेंटर्स साथ हर विधानसभा में अलग से कॉल सेंटर तैयार कर उन्हें अस्तित्व में लाए, ताकि जनता और बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क और समन्वय रहे। इसी प्रकार नवमतदाता अभियान चलाकर करीब 25 लाख नए मैंबर बनाए। अब इन सभी को अपने तरकश में समेटकर तीर छोडऩे की कवायद में संगठन जुट गया है।
बूथ तक पहुंची भाजपा
संगठन ने बूथ लेवल पर सोशल मीडिया के माध्यम से विधानसभाओं में अपने पैर फैलाए हैं। वहीं नमो वॉलिंटियर अभियान, आकांक्षा पेटी अभियान, सामाजिक संपर्क अभियान के तहत ओबीसी, एसटी व एससी वर्ग में घुसपैठ की। गांव-गांव, ढाणी-ढाणी, बूथ व घरों तक वर्कर्स पहुंचकर अंदरखाने ही पार्टी की नीतियां व केंद्र की योजनाओं की जानकारी पहुंचाने के अभियान में लगे हैं। वहीं विस्तारकों को भी सक्रिय कर दिया गया है। राजस्थान के सभी प्रमुख नेताओं और क्षत्रपों को एक साथ एक माला में पिरो संगठन सर्वोपरि की नीति से चन्द्रशेखर सब को साथ लेकर अपने माइक्रोमैनेजमेंट से राजस्थान विजय करने में जुटे हैं।
