ओडिशा: पांच दशक बाद चुनावी मैदान से बाहर हुए गमांग और पांगी परिवार, ऐसे शुरू हुआ था बुरा दौर

  • Edited by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Apr 4, 2024, 06:15 PM IST

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार चुनावी राजनीति में गमांग परिवार का बुरा दौर 2009 में शुरू हुआ जब गिरिधर गमांग कोरापुर लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर बीजद के उम्मीदवार जयराम पांगी से चुनाव हार गए थे।

Odisha Politics: कांग्रेस ने ओडिशा की कोरापुट और नवरंगपुर लोकसभा सीट से उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है तथा इस बार पूर्व मुख्यमंत्री गिरिधर गमांग एवं कोरापुट से पूर्व सांसद जयराम पांगी के परिवारों समेत प्रमुख राजनीतिक परिवार चुनाव मैदान से नदारद हैं। अगर उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवारों के तौर पर चुनाव नहीं लड़ा तो पांच दशक में पहली बार ऐसा होगा कि आदिवासी बहुल कोरापुट जिले में ये प्रभावशाली परिवार चुनावी मुकाबले में नहीं दिखेंगे। वर्ष 1999 में फरवरी से दिसंबर तक ओडिशा के मुख्यमंत्री रहे गमांग (81) 1972 से 2004 तक नौ बार कोरापुट लोकसभा सीट से सांसद रहे हैं। उन्हें 2009 और 2014 के चुनाव में बीजू जनता दल (बीजद) से हार का सामना करना पड़ा था।

Giridhar Gamang

गिरिधिर गमांग

2015 में गमांग परिवार भाजपा में गया

गिरिधर गमांग की पत्नी हेमा गंमांग भी 1999 में कोरापुट से सांसद रहीं, हालांकि 2015 में गमांग परिवार के भाजपा में चले जाने के बाद राजनीतिक परिदृश्य बदल गया। बाद में गमांग परिवार ने भारत राष्ट्र समिति का दामन थामा और फिर इस साल जनवरी में कांग्रेस में वापस लौट आया। गमांग के पुत्र शिशिर नवरंगपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे जबकि हेमा ने कोरापुट लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली गुनुपुर विधानसभा सीट से टिकट मांगा था। लेकिन कांग्रेस ने गमांग परिवार को टिकट नहीं दिया और इस तरह यह परिवार संभवत: 1972 के बाद पहली बार चुनावी मुकाबले में किनारे लग गया।

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