आशुतोष भारद्वाज, वरिष्ठ पत्रकार : दिल्ली में सत्ता की चाबी झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों वोटरों के पास माना जाता है क्योंकि दिल्ली का हर चौथा मतदाता झुग्गियों में रहता है और ये बढ़-चढ़ कर वोटिंग में हिस्सा भी लेते हैं। ऐसे में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों को लुभाने के लिए आम आदमी पार्टी, बीजेपी, कांग्रेस समेत तमाम पार्टियां लगी हुई हैं। दिल्ली में 1800 से ज्यादा छोटी-बड़ी झुग्गी बस्तियां हैं जिनमें करीब 20 लाख मतदाता रहते हैं। यानी दिल्ली के कुल मतदाताओं की 30 फीसदी आबादी। ये जिन पर मेहरबान होते हैं सरकार उसी की बनती है। 2013-14 से अभी तक के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को सत्तासीन करने में इनका अहम रोल रहा है।
दिल्ली में पांच फरवरी को होगा मतदान।
2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में सेंट्रल दिल्ली की झुग्गी बस्तियों के 50 फीसदी से ज्यादा वोट आम आदमी पार्टी को मिले थे। वहीं पूर्वी दिल्ली में 52 फीसदी, बाहरी दिल्ली में 53 फीसदी वोटरों ने आम आदमी पार्टी का समर्थन किया था यानी झुग्गी बस्तियों में आधे से ज्यादा वोटरों ने आम आदमी पार्टी को अपना मत दिया। इन वोटरों को अपने पाले में करने के लिए सभी पार्टियों ने एड़ी-चोटी का जोर लगाया है। हालांकि, फ्री बिजली और फ्री पानी का जादू इन पर अभी भी चलता हुआ दिख रहा है।
झुग्गी वाले बचा रहे हैं पैसे
झुग्गी में रहने वाला एक परिवार 200 यूनिट फ्री बिजली से करीब 2000 रुपए की बचत हर महीने कर रहा है। वहीं, 20 हजार लीटर फ्री पानी से उसे 1000 रुपए हर महीने की बचत हो रही है। झुग्गियों में रहने वाले लोगों के लिए मोहल्ला क्लीनिक एक वरदान साबित हुआ है। इन क्लीनिकों में उन्हें फ्री में डॉक्टर देखते हैं और जरूरी दवाइयां भी फ्री में मिल जाती है। इन पर होने वाले खर्च की भी बचत हो रही है। परिवार के बच्चे सरकारी स्कूलों में जा रहे हैं जहां स्कूल यूनिफॉर्म, किताब-कॉपी मुफ्त मिल रही है। स्कूल में कोई फीस नहीं देना पड़ता। स्कूलों की हालात में सुधार के साथ-साथ पढ़ाई का आर्थिक बोझ भी अभिभावकों पर नहीं है, जिससे झोपड़पट्टियों में रहनेवाले केजरीवाल की तारीफ कर रहे हैं। इनका मानना है कि केजरीवाल ने बच्चों की पढ़ाई फ्री करके इनकी 10 हजार रुपए हर महीने की बचत कर दी। अगर इन्हें ये पैसे देने पड़ते तो बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल हो जाता। बुजुर्गों के लिए घोषित संजीवनी योजना को लेकर भी झुग्गीवाले काफी उत्साहित दिखे। इनका कहना है कि छोटा-मोटा इलाज तो मोहल्ला क्लीनिक में फ्री हो जाता है लेकिन बड़ी बीमारियों के लिए सरकारी अस्पताल में लंबी लाइनें लगानी पड़ती हैं। डॉक्टर तक पहुंचने में ही महीनों इंतजार करना पड़ जाता है जिससे केस और भी खराब हो जाता है। संजीवनी योजना के तहत वो दिल्ली के बड़े से बड़े प्राइवेट अस्पतालों में बुजुर्गों का इलाज मुफ्त में करा पाएंगे। ये सोचकर भी उनके चेहरे पर आशा के भाव नजर आते हैं।
झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाली महिलाएं बसों के मुफ्त सफर का मजा पिछले 5 सालों से उठा रही हैं। 5 साल पहले की स्थिति से तुलना करते हुए ये दावा करती हैं कि 1000 रुपए तो हर महीने इनकी बचत हो रही है। इनका मानना है कि केजरीवाल अब चुनाव के बाद 2100 रुपए भी हर महीने खाते में डालने लगेंगे तो इनकी आमदनी बढ़ जाएगी। कुल मिलाकर केजरीवाल के 25000 से ज्यादा हो रही हर महीने की बचत और सरकार बनने पर 10 हजार इजाफा होने के दावे का ये समर्थन करती नजर आ रही हैं।
बीजेपी से डरा रही है ‘आप’
अपनी चुनाव सभाओं और बातचीत में आम आदमी पार्टी के तमाम नेता झुग्गी-झोपड़ीवालों को ये समझाने की कोशिश कर रहे हैं अगर बीजेपी सत्ता में आई तो ये सारी फ्री की रेवड़ियां बंद कर दी जाएंगी और उन पर हर महीने करीब 25 हजार रुपए से ज्यादा का आर्थिक बोझ बढ़ जाएगा और इनके लिए दिल्ली में रहना कठिन हो जाएगा। झुग्गी-झोपड़ी वाले के इन समर्थकों से पूर्व सीएम केजरीवाल लगातार सतर्क रहने की अपील भी कर रहे हैं। केजरीवाल का दावा है कि 'अगर बीजेपी सत्ता में आई तो 6 महीने के अंदर इन झुग्गियों को तोड़ देगी और करोड़ों अरबों की ये जमीन अपने अरबपति दोस्तों को दे देगी। मुंबई के धारावी में एशिया के सबसे बड़ा स्लम है जिसकी जमीन बीजेपीवालों ने अपने अरबपति दोस्त को दे दी है।' झुग्गी झोपड़ी वालों को फंसाने की साजिश का आरोप लगाते हुए पूर्व सीएम केजरीवाल झुग्गियों में रहने वालों को मीडिया के माध्यम से संदेश दिया है कि 'पैसे के बदले स्याही लगवा ली या फर्जी वोट डाल दिया तो आप पर केस हो जाएगा और गिरफ्तारी हो जाएगी। आप सब झुग्गी वाले भोले-भाले लोग हो, अगर आपने गलती से भी पैसे के बदले स्याही लगवा ली या इनके कहने पर फर्जी वोट डाल दिया तो ये लोग आपको फंसा कर अगले दिन ही गिरफ्तार करवा देंगे। इसलिए चुनाव से पहली वाली रात खास तौर पर सतर्क रहें।'
डिस्क्लेमर : प्रस्तुत लेख में लेखक के निजी विचार हैं।
