सियासी दलों का परिवारवाद कैसे पहुंचा रहा BJP को फायदा, बिहार से लेकर महाराष्ट्र तक बल्ले-बल्ले

  • Authored by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Mar 21, 2024, 11:45 AM IST

परिवार आधारित पार्टियों में विभाजन के बाद कई राज्यों में अप्रत्यक्ष रूप से भगवा पार्टी को फायदा पहुंचाया है। क्षेत्रीय दलों में हालिया विभाजन से बीजेपी की बल्ले-बल्ले हुई है।

Parivarvaad in Parties Helping BJP: सियासत में परिवारवाद का मुद्दा भारतीय जनता पार्टी हर चुनाव में प्रमुखता से उठाती रही है। वंशवादी राजनीति पर पीएम मोदी से लेकर नड्डा तक तमाम नेता विपक्ष को घेरते हैं। लेकिन इसी वंशवादी सियासत ने बीजेपी को जबरदस्त फायदा भी पहुंचाया है। यूपी से लेकर बिहार और महाराष्ट्र तक ये साफ नजर आता है। जिस परिवारवाद पर बीजेपी लगातार हमला करती है, उसी परिवार आधारित पार्टियों में विभाजन के बाद कई राज्यों में अप्रत्यक्ष रूप से भगवा पार्टी को फायदा पहुंचाया है। क्षेत्रीय दलों में हालिया विभाजन से बीजेपी की बल्ले-बल्ले हुई है।

Political families in BJP

सियासी परिवारवाद

बिहार से लेकर महाराष्ट्र तक

2019 के बाद से बिहार में पासवान, हरियाणा में चौटाला और महाराष्ट्र में पवार परिवार को विभाजन का सामना करना पड़ा है। अलग हुए समूहों ने बीजेपी से हाथ मिला लिया, जिससे इन राज्यों भगवा पार्टी मजबूत हो रही है। यहां तक कि उसे सरकार बनाने में भी मदद मिली। हरियाणा और महाराष्ट्र में इसे साफ देखा जा सकता है। इस सूची में शामिल होने वाला नया नाम है सोरेन परिवार। झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के परिवार में विभाजन हुआ है पार्टी के संस्थापक शिबू सोरेन की बहू सीता सोरेन मंगलवार को भाजपा में शामिल हो गईं।

सीता सोरेन पर बीजेपी का दांव

झामुमो परिवार में तनाव लंबे समय से चल रहा था। राज्य में भाजपा के पास कोई मजबूत चेहरा नहीं है। लोकसभा चुनाव से पहले सीता सोरेन के पाला बदलने का समय अहमियत रखता है। इस साल के अंत में झारखंड में भी विधानसभा चुनाव होंगे। इससे बीजेपी को खनन मामले में गिरफ्तार पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन के पक्ष में सहानुभूति लहर को रोकने में मदद मिलेगी। बीजेपी सीता सोरेन का इस्तेमाल प्रचारक या उम्मीदवार के रूप में कर सकती है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब झामुमो कल्पना सोरेन को अपने अभियान का चेहरा बनाने की रणनीति में जुटी थी। दरअसल, सीता सोरेन ने जनवरी में तब नाराजगी जाहिर की थी जब ऐसी अटकलें चल रही थीं कि कल्पना को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।

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