Mokama Assembly Election 2025: मोकामा में दुलारचंद हत्याकांड से क्या बिगड़ गया समीकरण? किस ओर झुकेगा मोकामा का D-फैक्टर

Mokama Assembly Constituency (मोकामा विधानसभा सीट): मोकामा विधानसभा क्षेत्र बिहार की राजनीति में अहम भूमिका निभाता है। भूमिहार बहुल इस सीट पर पिछले दो दशकों से अनंत सिंह का दबदबा रहा है, लेकिन 2025 के चुनाव में समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। जनसुराज समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या ने जातीय ध्रुवीकरण और सहानुभूति की लहर को जन्म दिया है। आइए समझते हैं क्या है मोकामा सीट का हाल।

Mokama Assembly Constituency (मोकामा विधानसभा सीट): गंगा के दक्षिणी किनारे पर स्थित मोकामा विधानसभा क्षेत्र न सिर्फ पटना से महज 85 किलोमीटर की दूरी पर है, बल्कि यह बिहार की राजनीति की धड़कन भी माना जाता है। कभी इसे 'उत्तर बिहार का प्रवेश द्वार' कहा जाता था, क्योंकि यहां स्थित राजेंद्र सेतु ने वर्षों तक उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़े रखा। आज भी जब बिहार विधानसभा चुनाव की चर्चा होती है, तो पटना जिले की इस सीट पर सबकी नजरें टिकी रहती हैं।

Mokama Assembly Constituency.

मोकामा में कैसा है चुनावी समीकरण

क्या है मोकामा सीट का इतिहास

मोकामा, जो मुंगेर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, का गठन 1951 में विधानसभा क्षेत्र के रूप में हुआ था। पिछले तीन दशकों से यहां की राजनीति बाहुबलियों के प्रभाव में रही है, लेकिन 2005 से जदयू नेता अनंत सिंह, जिन्हें 'छोटे सरकार' के नाम से जाना जाता है, ने इस सीट को अपनी मजबूत पकड़ में ले लिया है। उनके प्रभाव को चुनौती देना किसी भी प्रतिद्वंद्वी के लिए आसान नहीं रहा। 1990 के दशक में मोकामा की राजनीति में बड़े नेताओं का वर्चस्व रहा, जिसकी शुरुआत दिलीप कुमार सिंह उर्फ 'बड़े सरकार' से हुई। वे 1990 और 1995 में जनता दल के टिकट पर विधायक बने और लंबे समय तक मंत्री भी रहे। 2005 में अनंत सिंह के उभार के साथ ही मोकामा की राजनीतिक कहानी ने नया मोड़ लिया और तब से यह सीट 'छोटे सरकार' के नाम से पहचानी जाने लगी। अनंत सिंह ने लगातार पांच बार इस सीट पर जीत दर्ज की है।

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