Assembly Elections 2023: पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव निपटने के बाद हर दल ने अपने-अपने दावे ठोंके, जबकि सब अपने-अपने हिसाब से परिणाम को लेकर आस लगाए हैं। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को भी चुनाव के नतीजों से बड़ी उम्मीदें हैं। भाजपा को लगता है कि मध्य प्रदेश, राजस्थान में छत्तीसगढ़ में उसकी सरकार बन सकती है। हालांकि, तेलंगाना को लेकर उसे बार-बार चिंता सता रही है कि आखिरकार वहां क्या होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि वहां पर बीजेपी का पिछले दो विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड कुछ खास नहीं रहा है। सरल भाषा में कहें तो भाजपा का वहां फ्लॉप शो देखने को मिला है।
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (क्रिएटिवः अभिषेक गुप्ता)
पांच में से चार सूबों (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और तेलंगाना) के चुनाव परिणाम के लिए मतों की गिनती रविवार (तीन दिसंबर, 2023) को होगी, जबकि शेष पांचवें राज्य और नॉर्थ ईस्ट के तहत आने वाले मिजोरम में एक रोज बाद यानी सोमवार (चार दिसंबर, 2023) को मतगणना की जाएगी। सुबह से ट्रेंड्स (रुझान) आने लगेंगे, जबकि दोपहर तक तस्वीर लगभग साफ हो जाएगी कि कहां पर किस दल की सरकार बन सकती है।
वैसे, इन पांचों में से तीन राज्यों (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान) में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। वहीं, दक्षिण भारत राज्य तेलंगाना में सत्तारूढ़ बीआरएस, कांग्रेस और भाजपा, तीनों राजनीतिक दलों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। भाजपा को विधान सभा चुनाव में मध्य प्रदेश में सरकार बचा लेने के साथ ही राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस से सत्ता छीन लेने का पूरा भरोसा है यानी पार्टी को यह उम्मीद है कि वह हिंदी पट्टी के इन तीनों राज्यों में जीत हासिल करने जा रही है।
हालांकि, तेलंगाना को लेकर पार्टी की दुविधा बढ़ गई है क्योंकि अगर तेलंगाना में भाजपा दूसरे नंबर की पार्टी नहीं बन पाई तो इससे उसके मिशन साउथ इंडिया को लोक सभा चुनाव में करारा झटका लग सकता है। दरअसल, कर्नाटक में विधान सभा चुनाव हारने के बाद भाजपा ने तेलंगाना में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। पार्टी भले ही वहां केसीआर को हराकर राज्य में भाजपा की सरकार बनाने का दावा चुनावी रैलियों और सार्वजनिक मंचों से करते रही हो लेकिन आपसी बातचीत में भाजपा नेताओं का यह मानना होता था कि अगर पार्टी तेलंगाना में इस बार दूसरे नंबर की पार्टी भी बन जाती है तो इसका फायदा पार्टी को अपने मिशन साउथ इंडिया में हो सकता है और इस जीत का फायदा पार्टी तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल जैसे राज्य में भी उठा सकती है।
हालांकि, जिस तरह के एग्जिट पोल आए हैं, अगर चुनावी नतीजे भी कमोबेश उसी तरह से आते हैं तो यह बीजेपी के चुनावी रणनीतिकारों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं होगा। अगर एग्जिट पोल के अनुसार तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार बन जाती है तो भाजपा को इसका नुकसान राष्ट्रीय स्तर पर भी उठाना पड़ सकता है। कांग्रेस को कर्नाटक के बाद तेलंगाना जैसे संपन्न राज्य की गद्दी अगर मिल जाती है तो पार्टी को चुनावी खर्चे की रणनीति बनाने में काफी मदद मिलेगी। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए गठबंधन और इंडिया गंठबंधन से अलग हटकर तीसरा मोर्चा बनाने की बीआरएस की योजना भी धरी की रह जाएगी।
