सीबीएसई की तीन भाषा नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मामला 2026-27 के शैक्षणिक सत्र से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीसरी भाषा को अनिवार्य करने से जुड़ा है। नई व्यवस्था के तहत छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। इस नीति को लेकर छात्रों और अभिभावकों की ओर से कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 6 के छात्रों को भी कुछ राहत देने की संभावना पर विचार करने को कहा।
सीबीएसई की तीन भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि कक्षा 6 के छात्रों को भी मौजूदा छूट का लाभ देने पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इन छात्रों को जनवरी में ही अगली कक्षा में भेजा जा चुका है। ऐसे में उन्हें नई व्यवस्था में अचानक शामिल करने से दिक्कत हो सकती है। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वह संबंधित अधिकारियों से बुधवार या गुरुवार को बात करेंगे और सभी पक्षों से चर्चा करने के बाद सुप्रीम कोर्ट को बताएंगे कि इस पर क्या किया जा सकता है।
क्या है सीबीएसई की तीन भाषा नीति?
सीबीएसई ने 2026-27 के शैक्षणिक सत्र से तीन भाषा पढ़ने की व्यवस्था लागू की है। इसके तहत छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी और इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होंगी। कक्षा 7, 8 और 9 के छात्रों के लिए बदलाव को धीरे-धीरे लागू करने की व्यवस्था की गई है। वहीं 2026-27 में कक्षा 6 में दाखिला लेने वाले छात्र इस नई व्यवस्था को शुरुआत से अपनाने वाले पहले बैच होंगे।
कक्षा 6 को लेकर क्या सुझाव दिया कोर्ट ने?
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि सीबीएसई ने कुछ कक्षाओं के छात्रों को पहले से राहत दी है। उसी तरह कक्षा 6 के छात्रों को भी राहत देने पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इन छात्रों को जनवरी में ही अगली कक्षा में प्रमोट किया जा चुका है। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह संबंधित अधिकारियों से बात करेंगे और इस मुद्दे पर सभी पक्षों के साथ चर्चा करके सुप्रीम कोर्ट को जानकारी देंगे।
कक्षा 7 को 2028 तक टालने की जरूरत नहीं- CJI
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि कक्षा 7 के छात्रों पर नई व्यवस्था लागू करने के लिए 2028 तक इंतजार करने की जरूरत नहीं है। इसे 2026 से ही लागू किया जा सकता है। वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल एस. और आनंद ग्रोवर ने कहा कि अभिभावकों की चिंता बढ़ रही है। बच्चों को परीक्षा देनी है और मामले को ज्यादा लंबा नहीं खींचा जाना चाहिए। उन्होंने मामले को अगले सप्ताह सुनने की मांग की।
अंग्रेजी भाषा को लेकर भी हुई चर्चा
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह सवाल भी उठाया गया कि अगर गैर-मातृभाषा को लेकर कोई छूट दी जा रही है तो क्या अंग्रेजी को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अंग्रेजी को लेकर सरकार का अलग दृष्टिकोण है।
नई याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने तीन भाषा नीति को चुनौती देने वाली एक नई याचिका पर भी नोटिस जारी किया है। इस मामले में यशिका भंडारी जैन और अन्य की ओर से दायर याचिका समेत इससे जुड़े दूसरे मामलों पर अब 17 सितंबर 2026 को सुनवाई होगी। इन मामलों में सुप्रीम कोर्ट यह देख रहा है कि सीबीएसई की नई तीन भाषा व्यवस्था को किस तरह लागू किया जाए और मौजूदा छात्रों को इससे होने वाली संभावित परेशानी को किस तरह दूर किया जा सकता है।
