NEET UG 2026 Result: नीट यूजी 2026 का रिजल्ट जारी होने के बाद मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन को लेकर छात्रों की चिंता बढ़ गई है। इस बार सिर्फ परीक्षा का रिजल्ट ही चौंकाने वाला नहीं है, बल्कि क्वालिफाइंग कटऑफ में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। जनरल और EWS कैटेगरी की न्यूनतम क्वालिफाइंग कटऑफ पिछले साल के 144 अंकों से बढ़कर 213 अंक पहुंच गई है। यानी एक साल में कटऑफ में सीधे 69 अंकों का उछाल आया है।
नीट यूजी रिजल्ट 2026 कट ऑफ
बता दें कि नीट यूजी परीक्षा में 19 उम्मीदवारों ने 700 से ज्यादा अंक हासिल किए हैं। वहीं, 1,492 छात्रों के 650 या उससे ज्यादा अंक हैं, जबकि 10 हजार 160 उम्मीदवारों ने 600 से अधिक नंबर हासिल किए हैं। जानकारी के अनुसार, 90 हजार 780 उम्मीदवार ऐसे हैं, जिन्होंने 500 से ज्यादा अंक हासिल किए हैं।
NTA की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल NEET UG में करीब 20 लाख उम्मीदवार शामिल हुए और 11.21 लाख उम्मीदवार क्वालिफाई हुए हैं। हालांकि क्वालिफाई करना और सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS सीट हासिल करना दो अलग बातें हैं। यही वजह है कि बढ़ी हुई कटऑफ के बाद अब छात्रों के बीच सरकारी कॉलेज में एडमिशन को लेकर प्रतिस्पर्धा और ज्यादा बढ़ने की संभावना है।
जनरल कैटेगरी की कटऑफ में बड़ा उछाल
NEET UG 2026 में UR और EWS कैटेगरी के लिए क्वालिफाइंग कटऑफ 213 अंक रही है। पिछले साल यह 144 अंक थी। वहीं OBC, SC और ST कैटेगरी की कटऑफ भी 113 से बढ़कर 177 अंक हो गई है। यानी इन कैटेगरी में भी 64 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कटऑफ में यह उछाल छात्रों के प्रदर्शन और स्कोर वितरण में आए बदलाव को दर्शाता है।
देशभर में करीब 1.36 लाख MBBS सीटों के मुकाबले 11.21 लाख उम्मीदवारों ने NEET UG क्वालिफाई किया है। यानी हर क्वालिफाइड उम्मीदवार को MBBS सीट मिलना संभव नहीं है। उपलब्ध सीटों और उम्मीदवारों की संख्या का अंतर बताता है कि काउंसलिंग के दौरान छात्रों को अपनी पसंद और रैंक के आधार पर रणनीति बनानी होगी।
सरकारी MBBS सीट के लिए क्यों बढ़ी मुश्किल?
दरअसल, NEET UG में क्वालिफाइंग कटऑफ सिर्फ परीक्षा पास करने का न्यूनतम स्तर बताती है। सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए असली मुकाबला रैंक, कैटेगरी, राज्य कोटा और उपलब्ध सीटों के आधार पर होता है। इस साल 10,160 उम्मीदवारों ने 600 या उससे ज्यादा अंक हासिल किए हैं। ऐसे में अच्छे स्कोर वाले उम्मीदवारों की संख्या बढ़ने से सरकारी कॉलेजों में सीट हासिल करने की प्रतिस्पर्धा और कठिन हो सकती है।
