Lal Bahadur Shastri Jayanti Quotes, Speech, Essay in Hindi: लाल बहादुर शास्त्री के अनमोल विचार आज की पीढ़ी को हर परिस्थिति में प्रेरित और मार्गदर्शन करने का काम करते हैं। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, एक ऐसे स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने आजादी से पहले और आजाद भारत में अपने निर्णयों से भारत का मान बढ़ाने का काम किया। लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के लिए हिंदी में 100, 200 शब्दों के निबंध यहां देख सकते हैं।
लाल बहादुर शास्त्री जयंती 2024
कौन थे लाल बहादुर शास्त्री?
लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को हुआ था। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी के करीब मुगलसराय में हुआ था। लाल बहादुर शास्त्री को देश के दूसरे प्रधानमंत्री के तौर पर याद किया जाता है। लाल बहादुर शास्त्री का जन्म एक साधारण कायस्थ परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम शरद प्रसाद श्रीवास्तव था जो एक स्कूल में शिक्षक थे। उनकी माता का नाम रामदुलारी देवी थी।
लाल बहादुर शास्त्री की शुरुआती पढ़ाई वाराणसी के भारतेंदु हरिश्चंद्र इंटर कॉलेज से हुई। इसके बाद उन्होंने महात्मा गांधी काशी विद्यापिठ से उच्च शिक्षा लिया। उन्हें काशी विद्यापीठ वाराणसी से शास्त्री की उपाधि हासिल हुई थी, जो बाद में उनका उपनाम बन गया।
Lal Bahadur Shastri Quotes in Hindi
"अनुशासन और एकता ही किसी देश की ताकत होती है।"
"देश की तरक्की के लिए हमें आपस में लड़ने के बजाय गरीबी, बिमारी और अज्ञानता से लड़ना होगा।"
"हर कार्य की अपनी एक गरिमा है और हर कार्य को अपनी पूरी क्षमता से करने में ही संतोष प्राप्त होता है।"
"हमें एक साथ मिलकर किसी भी प्रकार के अपेक्षित बलिदान के लिए दृढ़तापूर्वक तत्पर रहना है।"
"हमारी ताकत और मजबूती के लिए सबसे जरूरी काम है, लोगों में एकता स्थापित करना।"
Lal Bahadur Shastri Essay in Hindi: शास्त्री जयंती पर निबंध
2 अक्टूबर 1904 को जन्मे भारतरत्न लाल बहादुर शास्त्री ने भारत के दूसरे प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। बचपन में उनके करीबी और प्रियजन उन्हें प्यार से 'नन्हे' कहकर बुलाते थे। लाल बहादुर शास्त्री ने साल 1930 में गांधी जी के नमक सत्याग्रह में भाग लिया और दो साल से अधिक समय तक जेल में रहे। इसके बाद भारत छोड़ो आंदोलन से जुड़कर वो देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों की श्रेणी में शामिल हो गए। वो महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के बेहद करीब रहे।
साल 1964 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद शास्त्री जी को देश का प्रधानमंत्री बनाया गया। हालांकि, इस बीच 13 दिन के कार्यकारी प्रधानमंत्री के तौर पर गुलजारी लाल नंदा ने सत्ता संभाली थी। शास्त्री जी 1 साल 216 देश के प्रधानमंत्री रहे। इस दौरान उन्होंन 1965 की जंग में पाकिस्तान को घुटने टेकवा दिए थे।
प्रधानमंत्री के रूप में शास्त्री के कार्यकाल का एक प्रमुख आकर्षण 1966 में ताशकंद समझौते पर हस्ताक्षर करना था| इससे भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को प्रभावी ढंग से समाप्त कर दिया।11 जनवरी, 1966 को ताशकंद, उज़्बेकिस्तान की यात्रा के दौरान शास्त्री की अप्रत्याशित मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु भारत और विश्व के लिए एक बड़ा झटका थी। शास्त्री जी की विरासत दुनिया भर के लोगों को प्रेरित करती रहती है। वह अत्यंत सादगी, ईमानदारी और साहस के व्यक्ति थे।
