Indian Army Rule: भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना देश के लाखों युवाओं का सपना होता है। अपने इस सपने को पूरा करने के लिए युवा दिन-रात कड़ी मेहनत करते हैं और लिखित परीक्षा के साथ फिजिकल फिटनेस टेस्ट की तैयारी में जुटे रहते हैं। लेकिन लिखित परीक्षा और फिजिकल टेस्ट पास करने के बाद सबसे अहम पड़ाव होता है 'मेडिकल एग्जामिनेशन'। परीक्षा और फिजिकल टेस्ट में बेहतरीन प्रदर्शन के बाद मेडिकल जांच के दौरान अक्सर उम्मीदवारों के मन में यह चिंता रहती है कि उनके शरीर पर मौजूद पुराने चोट, सर्जरी या जले के निशान उन्हें अयोग्य यानी अनफिट तो नहीं ठहरा देंगे? आइए जानते हैं कि शरीर के निशानों को लेकर सेना के मेडिकल बोर्ड के क्या नियम हैं।
क्या चोट के निशान बन सकते हैं सेना में जाने में बाधा?(Photo - AI)
चोट के निशानों पर क्या कहता है सेना का नियम?
भारतीय सेना (Indian Army) की मेडिकल गाइडलाइन के अनुसार, शरीर पर किसी भी चोट या सर्जरी का निशान अपने आप में अयोग्यता का कारण नहीं बनता है। मेडिकल बोर्ड का मुख्य ध्यान इस बात पर रहता है कि क्या वह निशान उम्मीदवार की शारीरिक क्षमता, मूवमेंट या हथियारों को संभालने में कोई बाधा उत्पन्न कर सकती है या नहीं। उसके आधार पर ही चोट के निशान आदि पर आयोग्यता तय की जाती है। सेना के नियमों को समझने के लिए निशानों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जाता है, जिसमें पहला सामान्य और स्वीकार्य निशान है और दूसरा गंभीर और अस्वीकार्य निशान है। आइए इनके बारे में विस्तार से जानें।
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सामान्य और स्वीकार्य निशान
- बचपन में गिरने, कटने या हल्की-फुल्की चोट के ऐसे निशान जो पूरी तरह ठीक हो चुके हैं और त्वचा की ऊपरी सतह तक ही सीमित हैं, उन्हें स्वीकार किया जाता है। - ऐसी चोट की सर्जरी कराई है जो अब पूरी तरह ठीक हो चुकी है और उससे हड्डियों, मांसपेशियों या तंत्रिकाओं यानी Nerves के काम करने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ा है, तो इसे मेडिकल बोर्ड द्वारा आमतौर पर फिट घोषित कर दिया जाता है।
- ऐसे निशान, जो शरीर के ऐसे हिस्से पर है जहां यूनिफॉर्म या सैन्य उपकरण पहनते समय लगातार घर्षण यानी फिक्शन नहीं होता, तो उम्मीदवारों को योग्य माना जाता है।
- यदि टैटू को लेजर से हटवाया गया है, जिसके बाद वहां की त्वचा पूरी तरह सामान्य हो गई है, तो वह स्वीकार्य है।
गंभीर और अस्वीकार्य निशान
- यदि किसी चोट या सर्जरी के बाद त्वचा पर मोटा, उभरा हुआ और दर्दनाक निशान केलोइड्स बन जाता है, तो सेना में इसे 'अयोग्य' माना जाता है। ऐसे निशान में रगड़ लगने पर संक्रमण या दोबारा घाव होने का जोखिम रहता है।
- यदि हाथ, पैर, कोहनी, घुटने या गर्दन के पास किसी चोट या जलने का ऐसा निशान है जो जोड़ों के पूरी तरह मुड़ने या फैलने में रुकावट डालता है, तो उम्मीदवार को अनफिट घोषित कर दिया जाता है।
- चेहरे की गंभीर विकृति या सिर पर हड्डियों को नुकसान पहुंचाने वाले गहरे निशान भी सेना में भर्ती के लिए अस्वीकार्य होते हैं।
- यदि टैटू को लेजर से हटवाया गया है, लेकिन हटाने के बाद वहां गहरा जख्म या केलोइड बन गया है, तो समस्या हो सकती है।
सेल्फ कट की स्थिति में क्या है नियम
यदि मेडिकल टेस्ट में पाया जाता है कि उम्मीदवार के शरीर पर ब्लेड आदि के निशान है, जो उसने खुद को गुस्से या तनाव की स्थिति में दिए हैं, तो ऐसे में आपको अयोग्य घोषित किया जाता है, क्योंकि इस स्थिति में आपकी साइक्लॉजिकल स्टेट और सेल्फ कंट्रोल के बारे में पता लगता है।
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उम्मीदवारों के लिए काम की सलाह
यदि आपके शरीर पर कोई पुराना निशान या सर्जरी का कट है, तो मेडिकल टेस्ट से पहले किसी योग्य सर्जन से उसकी जांच करवा लें। यदि वह निशान केवल त्वचा की रंगत में बदलाव है और आपके शरीर की ताकत या गति को प्रभावित नहीं करता, तो आपको घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। आप सेना के पूरी तरह से योग्य है।
