Chhattisgarh Teacher Recruitment: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य में 12,489 शिक्षकों की भर्ती से जुड़े वर्ष 2023 के विज्ञापन और आरक्षण रोस्टर को निरस्त कर दिया है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले का मतलब भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द करना नहीं है। वर्तमान में नौकरी कर रहे शिक्षकों को भी तत्काल प्रभाव से हटाया नहीं जाएगा। उनकी नियुक्तियां और पदोन्नति सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 12 हजार 489 शिक्षकों की भर्ती का विज्ञापन
याचिकाकर्ताओं ने रोस्टर को चुनौती देते हुए दलील दी कि अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए कुछ संवर्गों में 60 प्रतिशत से अधिक पद आरक्षित किए गए। उनके अनुसार, इससे अनारक्षित और अन्य आरक्षित वर्गों के अभ्यर्थियों के लिए उपलब्ध पदों की संख्या प्रभावित हुई। यह मामला सहायक शिक्षक, शिक्षक और व्याख्याता के 12,489 पदों पर भर्ती से जुड़ा है। राज्य सरकार ने 4 मई 2023 को छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) के माध्यम से भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। इसमें सरगुजा और बस्तर संभाग सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिए आरक्षण रोस्टर निर्धारित किया गया था।
दायर याचिका में बताया गया कि ई-कैडर के 1,113 पदों में से 698 पद एसटी वर्ग के लिए आरक्षित थे। यह कुल पदों का लगभग 62.71 प्रतिशत था। वहीं, टी-कैडर के 4,659 पदों में से 3,105 पद एसटी वर्ग के लिए निर्धारित किए गए थे, जो करीब 66.64 प्रतिशत है। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद भर्ती से जुड़े आरक्षण रोस्टर की वैधता पर नई स्थिति स्पष्ट हुई है। हालांकि, कार्यरत शिक्षकों की नियुक्तियों और पदोन्नति पर अंतिम स्थिति सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के निर्णय से तय होगी।
पहले भी रद्द हो चुकी थी आरक्षण व्यवस्था
राज्य सरकार ने 29 नवंबर 2012 की अधिसूचना के तहत आरक्षण व्यवस्था में बदलाव किया था। इसके अंतर्गत अनुसूचित जाति के लिए 12 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लिए 32 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित था। कुल आरक्षण 58 प्रतिशत था।हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 19 सितंबर 2022 को इस अधिसूचना और संबंधित मॉडल रोस्टर को असंवैधानिक ठहराते हुए निरस्त कर दिया था। इसके बावजूद 2023 की भर्ती में इसी व्यवस्था को आधार बनाए जाने पर सवाल उठे।
