नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट अंडरग्रेजुएट (National Eligibility Cum Entrance Test Undergraduate) का रिजल्ट जारी कर दिया है। इस बार कुल 11.21 लाख छात्र सफल घोषित किए गए हैं। यहां पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल ने 715 अंक प्राप्त कर पहली रैंक हासिल किया है। वहीं 138 उम्मीदवारों ने 720 में से 690 से ज्यादा अंक हासिल किए हैं। इनमें 93 फीसदी से ज्यादा उम्मीदवार पहली बार NEET UG परीक्षा में शामिल हुए थे। वहीं कई छात्रों के 720 में से 580, 590 या 600 या उससे अधिक मार्क्स भी हैं। ऐसे में अधिकतर छात्रों व उनके अभिभावकों का सवाल है कि नीट यूजी की परीक्षा में 600 अंक आने पर सरकारी कॉलेज मिल सकता है या नहीं? यहां आप अपने इस सवाल का जवाब जान सकते हैं।
NEET UG Counselling 2026: नीट यूजी में 600 अंक आने पर सरकारी कॉलेज मिलेगा या नहीं
आपके भी 600 या इससे मार्क्स हैं तो जान लें
बता दें साल 2025 के मुकाबले इस साल के कटऑफ में बड़ा उछाल देखने को मिला है। इस बार सामान्य वर्ग (General Category), ईडब्ल्यूएस (EWS) वर्ग के लिए न्यूनतम मार्क्स 144 से बढ़कर 213 मार्क्स हो गया है। वहीं अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) व बीसी (BC) वर्ग के लिए कटऑफ 113 से बढ़कर 177 नंबर हो गया है। इससे साफ है कि यदि पिछली बार की तुलना में कटऑफ बढ़ी है तो इसका सीधा असर एडमिशन पर पड़ेगा। ऐसे में जिन छात्रों के 600 मार्क्स आए हैं उनके एडमिशन में भी दिक्कत हो सकती है।
स्टेट कोटा काउंसलिंग में ज्यादा संभावना
ऑल इंडिया कोटा (AIQ) की काउंसलिंग मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) कराती है। जबकि 85% राज्य कोटा की काउंसलिंग संबंधित राज्यों की एजेंसियों की ओर से आयोजित की जाती है। ऐसे में एमसीसी काउंसलिंग में कॉलेज मिलना ऐसे छात्रों के लिए मुश्किल हो सकता है। इन स्टूडेंट्स को स्टेट कोटा काउंसलिंग के लिए अप्लाई करना चाहिए। यहां आपको गवर्नमेंट कॉलेज में एमबीबीएस में एडमिशन मिलने की संभावना अधिक है। यहां आप जान सकते हैं कि दिल्ली एम्स में एडमिशन के लिए कितने नंबर होने चाहिए।
दिल्ली एम्स में एडमिशन के लिए कितने नंबर
एम्स दिल्ली की बात करें तो यहां एडमिशन के लिए जिन छात्रों के 690 से 715 अंक हैं उनकी प्रबल दावेदारी है। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। इसके लिए काउंसलिंग का इंतजार करें।
