Bennett University Deeksharambh 2026: बेनेट यूनिवर्सिटी के दीक्षारंभ 2026 कार्यक्रम में भारतीय अंतरिक्ष यात्री और इंडियन एयरफोर्स के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla) ने फ्रेशर्स को सफलता का मंत्र देते हुए कहा कि जीवन में असफलताएं आना स्वाभाविक है। जरूरी यह है कि हर असफलता से सीख लेकर आगे बढ़ा जाए। उन्होंने छात्रों से अपनी तैयारी पर भरोसा रखने और भारत के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष अभियानों में योगदान देने का आह्वान किया।
बेनेट यूनिवर्सिटी दीक्षारंभ 2026 में अंतरिक्षयात्री शुभांशु शुक्ला
ग्रेटर नोएडा स्थित बेनेट यूनिवर्सिटी में छात्रों को संबोधित करते हुए शुभांशु शुक्ला ने कहा कि आने वाले वर्षों में उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ धैर्य, अनुशासन और विपरीत परिस्थितियों से उबरने की क्षमता भी विकसित करनी होगी। अंतरिक्ष यात्रा के अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में सबसे जरूरी है कि व्यक्ति अपने सामने मौजूद काम पर ध्यान केंद्रित करे। उन्होंने जोर देकर कहा कि अनुभव चाहे सफलता का हो या असफलता का, दोनों से सीखना जरूरी है।
'असफलता अंत नहीं, सीखने का मौका है'
शुभांशु शुक्ला ने छात्रों को समझाया कि असफलता को लेकर डरने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय यह समझना चाहिए कि गलती कहां हुई और उससे क्या सीखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि सफलता भी व्यक्ति को सीखने और आगे बढ़ने का मौका देती है। इसलिए सफलता के बाद भी आत्मसंतुष्ट होने के बजाय लगातार बेहतर करने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने अपने अंतरिक्ष मिशन का उदाहरण देते हुए कहा, “हर कोई गलतियां करता है। अंतरिक्ष में हम सभी किसी न किसी चीज में असफल हुए हैं।”
'अंतरिक्ष से लौटने के बाद चलना भी मुश्किल था'
अपने संबोधन को हल्का-फुल्का बनाते हुए शुक्ला ने अंतरिक्ष से पृथ्वी पर लौटने के बाद सामने आई शारीरिक चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि स्प्लैशडाउन के करीब दो घंटे बाद वह ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे। लड़खड़ाने वाले अपने ही एक वीडियो का जिक्र करते हुए उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वीडियो देखकर ऐसा लग सकता है जैसे कोई व्यक्ति वीकेंड पार्टी के बाद चल रहा हो। हालांकि, उन्होंने तुरंत स्पष्ट किया कि अंतरिक्ष से लौटने के बाद उनकी स्थिति बिल्कुल अलग थी।
'जब रास्ता समझ न आए तो तैयारी पर भरोसा करें'
कॉलेज जीवन की शुरुआत कर रहे छात्रों को शुक्ला ने सलाह दी कि जब कभी उन्हें लगे कि वे किसी परिस्थिति में फंस गए हैं या उन्हें आगे का रास्ता स्पष्ट नहीं दिख रहा, तो उन्हें अपनी तैयारी पर भरोसा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में की गई तैयारी ही व्यक्ति को सही दिशा दिखाती है और उसका आत्मविश्वास वापस लाने में मदद करती है।
'भारत की अंतरिक्ष यात्रा में युवाओं की भी जिम्मेदारी'
शुभांशु शुक्ला ने छात्रों को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि देश आज अंतरिक्ष के क्षेत्र में बड़े लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। इनमें गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना और वर्ष 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री को उतारने की महत्वाकांक्षा शामिल है। उन्होंने छात्रों से कहा कि इन लक्ष्यों को केवल भविष्य में मिलने वाले करियर के अवसरों के रूप में नहीं देखना चाहिए बल्कि इन महत्वाकांक्षी योजनाओं को साकार करने में योगदान देना भी उनकी जिम्मेदारी है।
