दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ यानी DUSU चुनाव में हर साल बड़ी संख्या में छात्र अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं। शुक्रवार को भी दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। इस चुनाव में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव जैसे पदों के लिए उम्मीदवार मैदान में हैं। चुनाव में प्रमुख छात्र संगठन हिस्सा ले रहे हैं। मतगणना 19 सितंबर को होनी है। डीयू छात्रसंघ चुनाव केवल कैंपस की राजनीति तक सीमित नहीं रहे हैं। कई दशकों से यह चुनाव देश को ऐसे नेता भी देता रहा है, जिन्होंने आगे चलकर दिल्ली, राज्य और केंद्र की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
छात्र राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति तक... (Photo: AI Generated)
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव को लंबे समय से युवा नेतृत्व की प्रयोगशाला के तौर पर देखा जाता रहा है। यहां छात्र संगठन शिक्षा, फीस, छात्रावास, सुरक्षा, परिवहन और कैंपस सुविधाओं जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़ते हैं। यहां से निकले कई नेता आगे चलकर संसद, विधानसभा और केंद्र या राज्य सरकारों तक पहुंचे हैं।
अरुण जेटली: छात्र राजनीति से केंद्रीय मंत्री तक
डीयू छात्रसंघ से राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचने वाले प्रमुख नामों में अरुण जेटली का नाम शामिल है। वह छात्र राजनीति में सक्रिय रहे और आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिने गए। छात्र राजनीति के दौर में ही उन्होंने संगठन, बहस और सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी पकड़ बनाई। आगे चलकर यही अनुभव उनकी राजनीतिक यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बना। अरुण जेटली पेशे से वकील भी थे। केंद्र की राजनीति में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वह भारत के वित्त मंत्री और रक्षा मंत्री रहे। इसके अलावा सरकार में कई अन्य महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी उनके पास रही।
अजय माकन: डूसू के अध्यक्ष से केंद्रीय मंत्री तक
कांग्रेस नेता अजय माकन भी डीयू छात्रसंघ की राजनीति से निकले प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। वह वर्ष 1985 में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए थे। खास बात यह है कि वह इस पद पर चुने जाने वाले शुरुआती प्रमुख NSUI नेताओं में रहे। केंद्र में उन्होंने खेल एवं युवा मामलों, गृह मामलों और आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन जैसे विभागों की जिम्मेदारी संभाली। उनकी राजनीतिक यात्रा यह दिखाती है कि छात्र राजनीति से निकलकर कोई नेता राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक अपनी जगह बना सकता है। वह दिल्ली विधानसभा के सदस्य रहे और दिल्ली सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली।
विजय गोयल: छात्र आंदोलन से संसद तक
विजय गोयल भी दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति में पहुंचे प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। वह छात्र जीवन में सक्रिय रहे और बाद में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े। छात्र राजनीति ने उन्हें सार्वजनिक मुद्दों पर काम करने और युवाओं के बीच अपनी पहचान बनाने का अवसर दिया। बाद में उन्होंने इसी अनुभव को व्यापक राजनीतिक मंच पर इस्तेमाल किया। विजय गोयल ने केंद्र सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। वह केंद्र में राज्य मंत्री भी रहे। उनकी राजनीतिक यात्रा में छात्र आंदोलनों और संगठनात्मक गतिविधियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
रेखा गुप्ता: छात्र राजनीति से दिल्ली की सत्ता तक
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का नाम भी डीयू छात्र राजनीति से आगे बढ़ने वाले नेताओं में लिया जाता है। उन्होंने छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और बाद में दिल्ली की राजनीति में अपनी पहचान बनाई। उनकी राजनीतिक यात्रा में छात्र राजनीति का अनुभव एक महत्वपूर्ण शुरुआती पड़ाव रहा है। छात्र राजनीति के जरिए उन्होंने संगठन और सार्वजनिक जीवन में काम करने का अनुभव हासिल किया। इसके बाद वह दिल्ली की राजनीतिक व्यवस्था में आगे बढ़ीं और मुख्यमंत्री पद तक पहुंचीं।
विजेंद्र गुप्ता: छात्र राजनीति से दिल्ली विधानसभा तक
बीजेपी नेता विजेंद्र गुप्ता का नाम भी दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से जुड़ा रहा है। वह डीयू छात्रसंघ के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। उन्होंने दिल्ली की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। विजेंद्र गुप्ता दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। छात्र राजनीति के दौरान संगठन के साथ काम करने का अनुभव उनके राजनीतिक सफर में उपयोगी रहा।
आशीष सूद भी रहे छात्र राजनीति से जुड़े
आशीष सूद भी दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से आगे बढ़ने वाले नेताओं में शामिल हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा में छात्र संगठन से लेकर पार्टी संगठन तक का अनुभव दिखाई देता है। आगे चलकर वह दिल्ली की राजनीति में सक्रिय हुए और मंत्री पद की जिम्मेदारी तक पहुंचे। उन्होंने संगठनात्मक राजनीति में काम किया और बाद में बीजेपी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
