Meerut Crime News: जिस रेविता ने अपनी पति की हत्या की, हत्या के बाद लाश को सांप से डंसवाया, पति को मारने के बाद प्रेमी के साथ रहने के सपने देखी,अब वो फांसी के तख्ते पर झूलने वाली है। जो रेविता अपनी खुशी के लिए पति अमित कश्यप का गला दबाकर हत्यारिन बनी, वो रेविता आज जेल में रो रही है, फांसी से बचाने की गुहार लगा रही है, कानूनी रास्ते खोज रही है। जो रेविता कभी पति का मारकर जिंदगी में खुशियां लाने की तैयारी में थी और वो अपने प्रेमी से भी मिलने के लिए मोहताज है। दोनों को फांसी की सजा हुई है।
मेरठ का सांप कांड
मेरठ में 12 अप्रैल 2025 को अमित कश्यप की हत्या हुई थी, हत्या किसी और ने नहीं बल्कि अमित की पत्नी रेविता ने ही थी, उसी ने अपने आशिक के साथ मिलकर उसका गला दबाया था, इतना ही नहीं पति की हत्या में रेविता न फंसे इसलिए लाश को कई बार सांप से कटवाया था, लेकिन असलियत छिप नहीं सकी और पति की हत्यारन रेविता और उसका आशिक अमरदीप फंस गया। इसमें सबसे बड़ी गवाही रेविता के प्रेमी अमरदीप ने ही दी थी।
ज्यादा से ज्यादा उम्रकैद सोची थी, मिली फांसी की सजा
अदालत का फैसला आते ही रविता और उसके प्रेमी अमरदीप की जिंदगी का घटनाक्रम अचानक बदल गया। पति अमित कश्यप की हत्या के मामले में मौत की सजा सुनते ही दोनों खुद को संभाल नहीं पाए। अदालत में सजा का ऐलान हुआ तो दोनों रोने लगे। उन्होंने अपने चेहरे पर हाथ रख लिए और नीचे बैठ गए। फैसले का सदमा इतना गहरा था कि जेल पहुंचने के बाद दोनों ने रातभर खाना तक नहीं खाया।
दोनों को उम्मीद थी कि ज्यादा से ज्यादा उम्रकैद होगी और वो लोग कुछ सालों बाद जेल से बाहर आ जाएंगे, लेकिन फांसी की सजा हो गई। जेल प्रशासन के मुताबिक, रविता और अमरदीप को उम्मीद नहीं थी कि अदालत उन्हें मौत की सजा सुना सकती है। अब दोनों चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में बंद हैं, जहां उनकी सुरक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है।
जेल में रविता का नंबर 399, अमरदीप को मिला 400
अदालत के फैसले के बाद जेल में रविता और अमरदीप की पहचान अब कैदी नंबरों से भी जुड़ गई है। रविता को कैदी नंबर 399 और अमरदीप को 400 नंबर दिया गया है। दोनों को जेल के कपड़े उपलब्ध करा दिए गए हैं। जेल प्रशासन उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के मुताबिक, सजा सुनाए जाने के बाद दोनों की मानसिक स्थिति को देखते हुए उनकी काउंसलिंग कराई गई है। जेल प्रशासन का प्रयास है कि फैसले से लगे सदमे के बीच दोनों की स्थिति पर नजर रखी जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें सहायता दी जा सके।
रविता की तबीयत भी बिगड़ गई। उसे बुखार आने पर दवा दी गई। उसकी देखरेख के लिए महिला कर्मचारियों को तैनात किया गया है। वहीं, अमरदीप की निगरानी सीसीटीवी कैमरों के जरिए की जा रही है। जेल प्रशासन दोनों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर सतर्क है।
फांसी से बचने के लिए कानूनी तैयारी
रेविता और अमरदीप फांसी से बचने की तैयारी में भी जुट गए हैं। कानून मदद ले रहे हैं। सजा के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करने की तैयारी कर रहे हैं।
