Varanasi News: बाबा काशी विश्वनाथ की नगरी वाराणसी के लोगों को अब जल्द उत्पाती बंदरों से निजात मिलेगी। इसे लेकर बाकायदा फोरेस्ट महकमे ने एक कार्य योजना बनाई है। विभाग की ओर से बंदरों को पकड़ने के लिए अभियान की शुरूआत की जाएगी। बता दें कि, बंदरों को पकड़कर चंबल के जंगलों में छोड़ा जाएगा। हालांकि विभाग के पास इलाके के चंदौली और सोनभद्र जनपदों के जंगलों में इन्हें छोड़ने की तैयारी थी। मगर वहां के जंगलों में पहले से मौजूद बंदर और लंगूरों की संख्या अधिक होने के चलते अब विभाग के पासा चंबल के जंगल एक विकल्प के तौर पर मौजूद हैं। वाराणासी का वन विभाग मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की ओर से हरी झंडी मिलने का इंतजार कर रहा है। महकमे के सबसे बड़े अधिकारी की ओर से इशारा मिलते ही उत्पाती बंदरों को पकड़ने का अभियान शुरू कर दिया जाएगा।
वाराणासी के उत्पाती बंदर करेंगे चंबल की सैर
विभाग का रोजाना मिलती है इतनी शिकायतें
वन विभाग के आला अधिकारियों के मुताबिक शहर से रोज 10 से 12 शिकायतें उत्पाती बंदरों के आतंक की मिल रही है। गत वर्ष वन विभाग ने मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक से शहर से कुल 3860 बंदरों को नगर निगम की सहयोग से पकड़ कर जंगलों में छोड़ने की मांग की थी। हालांकि मंजूरी मिलने के बाद इनमें से दो सौ बंदरों को चंदौली के जंगल में छोड़ा भी गया था। मगर 3 हजार 838 बंदरों को पकड़ने की मंजूरी नहीं मिल पाई। विभाग के अधिकारी राकेश कुमार के मुताबिक नगर निगम ने कुल 3860 बंदरों को पकड़ने के लिए एप्लीकेशन दी थी।
अब मंजूरी मिलने की औपचारिकता बाकी है। यह मिलते ही मथुरा जनपद की एक संस्था के सहयोग से बंदरों को पकड़ जाएगा। राकेश कुमार के मुताबिक इन्हें छोड़ने पर अभी तक निर्णय नहीं हो पाया है। जिसमें चंदौली और सोनभद्र आदि जनपदों के जंगलों में बंदरों व लंगूरों की संख्या पर्याप्त होने के चलते इन्हें यहां पर छोड़ने की अनुमति नहीं है। अब विभाग बंदरों को पकड़कर चंबल के जंगलों में छोड़ने पर विचार कर रहा है। विभाग के आला अधिकारियों से एनओसी मिलते ही बंदरों के पकड़ने का अभियान चलाया जाएगा।
