भारत में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों पूरे देश में प्रसिद्ध हैं। लेकिन इसमें से वाराणसी का काशी विश्वनाथ मंदिर न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में प्रसिद्ध है। ज्योतिर्लिंग का महत्व, गंगा घाट की आरती, व मंदिरों से भरे इस शहर में एक बार सभी आना चाहते हैं। आज के समय में काशी विश्वनाथ मंदिर और वाराणसी शहर आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। काशि विश्वनाथ कॉरिडोर का लोकार्पण हुए 3 साल पूरे हो चुके हैं। इस अवसर पर मंदिर में भक्तों का जनसैलाब देखने को मिला। भारी संख्या में भक्त अपने भगवान के दर्शन के लिए पहुंचे। भक्तों को यहां भजनों पर झूमते हुए देखा गया। वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनने के बाद यहां पर्यटकों की संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है।
काशी विश्वनाथ मंदिर
तीन साल में वाराणसी में बढ़ा पर्यटन
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का लोकार्पण 13 दिसंबर 2021 में हुआ था। इस साल 13 दिसंबर को इसे 3 साल पूरे हो चुके हैं। इस दौरान लगभग 19 करोड़ 13 लाख श्रद्धालु मंदिर के दर्शन कर चुके हैं। भारत के कई अन्य पर्यटन क्षेत्रों की तुलना में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनने के बाद से वाराणसी का पर्यटन तेजी से बढ़ा है। इसमें सोशल मीडिया ने भी बहुत अहम रोल निभाया है। रील्स पर बनारस की खासियत और खूबसूरती को देख लोग यहां जाने का प्लान बनाते रहते हैं।
चढ़ावे से भोजन की उपलब्धता और शिक्षा बढ़ाने का प्रयास
काशी विश्वनाथ धाम के सीईओ विश्व भूषण मिश्रा बताते हैं कि श्रद्धालुओं द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर में चढ़ाए जा रहे चढ़ावे को श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास सनातन धर्म को बल देने के कार्य में लगाया जा रहा है। इतना ही नहीं, संस्कृत शिक्षा प्राप्त कर रहे सभी छात्रों को भोजन, वस्त्र और पुस्तक उपलब्ध करवाए जा रहा है। साथ ही अस्पतालों और अन्य स्थानों पर भोजन की उपलब्धता भी बढ़ाई गई है। ताकि जरूरतमंद लोगों को भोजन मिल सके।
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास सनातन पर्व को भी आयोजित करने में सहायता प्रदान करता है। सांस्कृतिक गतिविधियों को जीवंत रखने और कला संस्कृति को पुष्ट रखने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। 13 दिसंबर को तीन साल पूरे होने के बाद काशी विश्वनाथ कॉरिडोर अपने चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है। विश्व भूषण मिश्रा कहते हैं कि जिस प्रकार हमारे धर्म में चार वेद है, उसी प्रकार चौथा वर्ष भी हमारे लिए विशेष है और हम सनातन धर्म के वृद्धि के लिए प्रयास करते रहेंगे।
