हरिद्वार में आगामी अर्धकुंभ की तैयारियों के बीच ऊपरी गंगनहर को लगभग 20 दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। कल यानी मंगलवार, 20 अक्टूबर की रात से नहर में पानी का प्रवाह रोककर सफाई, सिल्ट निकालने, मरम्मत और घाटों से जुड़े निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। इसका असर हरिद्वार के हरकी पैड़ी सहित प्रमुख घाटों पर भी दिखने लगा है, जहां गंगा का जलस्तर घटने से श्रद्धालुओं को स्नान करने में परेशानी हो रही है। वहीं, गंगाजल पर निर्भर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-NCR के कुछ इलाकों में भी पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है।
अपर गंगा कैनाल मेंं 20 दिन के लिए पानी रोका गया
उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, Upper Ganga Canal की वार्षिक सफाई और मरम्मत के साथ अर्धकुंभ की तैयारियों से जुड़े कार्य भी किए जा रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नहर में 8 नवंबर के आसपास पानी दोबारा छोड़े जाने की उम्मीद है। हालांकि, नहर में पानी छोड़ने और संबंधित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से घरों तक सामान्य आपूर्ति बहाल होने के बीच कुछ समय का अंतर हो सकता है।
हरकी पैड़ी पर घटा गंगा का जलस्तर, श्रद्धालु परेशान
गंगनहर बंद होने का असर हरिद्वार के प्रमुख घाटों पर दिखाई दे रहा है। हरकी पैड़ी सहित कई स्थानों पर पानी का प्रवाह कम होने से श्रद्धालुओं को पारंपरिक गंगा स्नान करने में दिक्कत हो रही है। कुछ श्रद्धालु पानी कम होने के कारण लोटे और छोटे बर्तनों की मदद से स्नान कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के एग्जक्यूटिव इंजीनियर विकास त्यागी ने बताया हर साल गंग नहर को साफ-सफाई, घाटों का निर्माण और मरम्मत कार्यों के लिए बंद किया जाता है। हर की पैड़ी पर श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए स्नान के लिए गंगाजल छोड़ा जाएगा। वहीं गंगा स्नान करने वाले श्रद्धालुओं का कहना है जल कम होने की वजह से स्नान करने में परेशानी आई है, जितना जल होना चाहिए था उतना नहीं है, डुबकी लगाने में दिक्कत आ रही है लोटे से स्नान करना पड़ा है।
NCR में क्यों हो सकती है पानी की किल्लत
गंगनहर बंद होने का असर सिर्फ हरिद्वार तक सीमित नहीं है। गाजियाबाद के सिद्धार्थ विहार और प्रताप विहार स्थित गंगाजल ट्रीटमेंट प्लांट से नोएडा और गाजियाबाद के कई इलाकों में पानी की आपूर्ति की जाती है। नहर से पानी नहीं मिलने पर इन प्लांटों का संचालन प्रभावित हो सकता है, जिससे लोगों को पेयजल की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
यहां हो सकती है दिक्कत
- नोएडा और ग्रेटर नोएडा : गंगाजल पर निर्भर आवासीय और औद्योगिक क्षेत्र।
- गाजियाबाद : इंदिरापुरम, वैशाली, कौशांबी, वसुंधरा, सिद्धार्थ विहार और प्रताप विहार।
- डेल्टा कॉलोनियां : सूर्य नगर, बृज विहार, रामप्रस्थ और आसपास के इलाके।
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश : मेरठ, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर और हापुड़ के संबंधित जलापूर्ति क्षेत्र।
इस दौरान यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि सभी इलाकों में पानी पूरी तरह बंद होने की स्थिति एक जैसी नहीं होगी। स्थानीय निकाय वैकल्पिक जल स्रोतों, ट्यूबवेल और उपलब्ध भंडारण के जरिए आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश करेंगे। लेकिन पेयजल के एक बड़े स्रोत के प्रभावित होने से दिक्कतें जरूर हो सकती हैं।
क्यों हर साल बंद की जाती है गंगनहर?
मानसून के दौरान नहर में बड़ी मात्रा में सिल्ट यानी गाद जमा हो जाती है। इससे पानी के प्रवाह पर असर पड़ सकता है और नहर के ढांचे व तटबंधों की मरम्मत की जरूरत बढ़ जाती है। इसी कारण सिंचाई विभाग हर साल निर्धारित अवधि में नहर का पानी रोककर सफाई और रखरखाव का काम करता है। इस बार इस अवधि का इस्तेमाल अर्धकुंभ से पहले घाटों के निर्माण, मरम्मत और सौंदर्यीकरण के काम को आगे बढ़ाने के लिए भी किया जा रहा है।
कब सामान्य होगी पानी की सप्लाई?
गंगनहर में दिवाली यानी 8 नवंबर के आसपास पानी वापस छोड़े जाने की उम्मीद है। हालांकि, इसके बाद पानी को ट्रीटमेंट प्लांट और वितरण नेटवर्क के जरिए सामान्य रूप से घरों तक पहुंचने में कुछ अतिरिक्त समय लग सकता है। ऐसे में नोएडा और गाजियाबाद के निवासियों को इस अवधि में पानी का इस्तेमाल सावधानी से करने और अपने स्थानीय प्राधिकरण की आपूर्ति संबंधी सूचनाओं पर नजर रखने की जरूरत है।
