अरे कहां आ गए भाई?...मुजफ्फरनगर की जगह शामली पहुंचाया, गुगल मैप ने तोड़ा यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती का सपना

मुजफ्फरनगर में यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा देने पहुंचे कुछ अभ्यर्थियों का पेपर कथित तौर पर गूगल मैप की गलत लोकेशन के कारण छूट गया। अभ्यर्थियों का कहना है कि मैप उन्हें परीक्षा केंद्र की बजाय शामली जिले की ओर ले गया, जिससे वे समय पर नहीं पहुंच सके।

UP Police Constable Recruitment Exam 2026: यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा देने मुजफ्फरनगर पहुंचे कुछ अभ्यर्थियों का कहना है कि गूगल मैप पर दिखाई गई गलत लोकेशन के कारण वे अपने परीक्षा केंद्र तक समय पर नहीं पहुंच सके और उनकी परीक्षा छूट गई। गाजियाबाद और हापुड़ के कई अभ्यर्थी बुधवार को परीक्षा देने के लिए मुजफ्फरनगर आए थे। उनका कहना है कि जब उन्होंने नई मंडी कोतवाली क्षेत्र स्थित दीपचंद जैन इंटर कॉलेज की लोकेशन गूगल मैप पर सर्च की, तो मैप ने उन्हें शामली जिले की दिशा में भेज दिया। अभ्यर्थियों के अनुसार, गूगल मैप पर दिखाई गई लोकेशन को फॉलो करते हुए वे शामली जिले के चंदेडी गांव पहुंच गए। वहां पहुंचने के बाद उन्हें पता चला कि परीक्षा केंद्र की वास्तविक लोकेशन अलग है। तब तक परीक्षा का समय निकल चुका था। परीक्षा छूटने से नाराज अभ्यर्थी मुजफ्फरनगर कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर दोबारा परीक्षा आयोजित कराने की मांग की।

UP Police Constable Recruitment Exam

अभ्यर्थियों का एग्जाम छूट जाने से मचा हड़कंप (AI फोटो)

नाराज अभ्यर्थियों ने की दोबारा परीक्षा कराने की मांग

शामली में कई अन्य अभ्यर्थी भी हुए परेशान

शिकायत करने वालों में गाजियाबाद निवासी अरुण मलिक, विशाल, धर्मेंद्र चौधरी और मुकुल समेत हापुड़ के कई अभ्यर्थी शामिल थे। उन्होंने प्रशासन को बताया कि गलत लोकेशन के कारण न केवल वे बल्कि कई अन्य अभ्यर्थी भी परेशान हुए। उनका आरोप है कि जिस जगह पर वे पहुंचे थे, वहां बड़ी संख्या में अन्य परीक्षार्थी भी गूगल मैप की गलत जानकारी के चलते भटक गए थे। पीड़ित अभ्यर्थी अरुण मलिक ने बताया कि उनकी परीक्षा पहली पाली में थी। मुजफ्फरनगर पहुंचने के बाद उन्होंने मोबाइल पर परीक्षा केंद्र की लोकेशन डाली, जिसके बाद गूगल मैप उन्हें करीब 59 किलोमीटर दूर शामली जिले के चंदेडी गांव ले गया। उनका कहना है कि परीक्षा केंद्र का नाम और कोड डालने के बावजूद उन्हें गलत स्थान पर पहुंचा दिया गया। बाद में स्थानीय लोगों से जानकारी मिलने पर वे मुजफ्फरनगर पहुंचे और प्रशासन से अपनी समस्या साझा की।

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