Delhi Building Collapse Ground Report: दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक हादसे ने राजधानी में इमारतों की सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में छात्रों और मजदूरों की जान जाने के बाद उनके परिवार यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर उनकी क्या गलती थी। घटना के बाद सरकार ने लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया, बिल्डिंग मालिक की गिरफ्तारी हुई और कुछ MCD अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन खामियों पर हादसे के बाद कार्रवाई की गई, उन्हें पहले क्यों नहीं सुधारा गया? इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए टाइम्स नाउ नवभारत की टीम ने दिल्ली के अलग-अलग इलाकों का जायजा लिया। पड़ताल का मकसद यह समझना था कि राजधानी में संचालित हो रहे पीजी कितने सुरक्षित हैं, पुरानी इमारतों की स्थिति क्या है और निर्माणाधीन इमारतों में भवन निर्माण से जुड़े नियमों का कितना पालन किया जा रहा है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली की इमारतों की हकीकत बेनकाब
तीमारपुर में झुकी मिली पांच मंजिला इमारत
सबसे पहले टीम तीमारपुर पहुंची। घनी आबादी के बीच स्थित इस इलाके में एक ऐसी इमारत सामने आई, जो देखने में बहुत पुरानी नहीं लगती, लेकिन उसकी स्थिति चिंता पैदा करती है। करीब पांच मंजिला यह इमारत एक तरफ झुकी हुई दिखाई देती है। दो इमारतों के बीच बनी बड़ी दरार भी इसकी स्थिति को लेकर गंभीर आशंका पैदा करती है। इसी परिसर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए लाइब्रेरी भी संचालित होती है, जहां बड़ी संख्या में छात्र पहुंचते हैं।
ऐसे में अगर इमारत की संरचनात्मक स्थिति कमजोर है तो किसी संभावित हादसे की स्थिति में बड़ी संख्या में लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है। जानकारी के मुताबिक, MCD ने साल 2023 में इस इमारत को खाली करने का नोटिस चस्पा किया था। इसके बाद इमारत खाली भी करा दी गई, लेकिन लंबे समय तक आगे की कार्रवाई नहीं हुई। सत्य निकेतन हादसे के बाद अधिकारियों ने इस इमारत का भी निरीक्षण किया। सवाल यह है कि अगर इमारत पहले से ही असुरक्षित मानी गई थी तो समय रहते इसे लेकर ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए?
मुखर्जी नगर के पीजी में सुरक्षा मानकों पर सवाल
इसके बाद हमारी टीम मुखर्जी नगर पहुंची। यह इलाका प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले हजारों छात्रों का प्रमुख ठिकाना है और बड़ी संख्या में छात्र यहां पीजी में रहते हैं। पड़ताल के दौरान एक ऐसे पीजी की स्थिति सामने आई, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। चार मंजिला इमारत की पहली और दूसरी मंजिल पर कमरे किराए पर दिए गए हैं, जबकि ऊपर की मंजिल और छत के हिस्से में पोटा केबिन लगाकर छोटे-छोटे कमरे तैयार किए गए हैं। इन कमरों में कई छात्रों के रहने की बात सामने आई।
छात्रों के मुताबिक, कम जगह में दो से तीन लोगों को रखा जाता है और इसके लिए हर छात्र से हजारों रुपये किराया लिया जाता है। छात्रों ने यह भी बताया कि कमरों में रहना और पढ़ाई करना मुश्किल है। सुविधाओं की कमी के साथ-साथ सुरक्षा इंतजाम भी चिंता का विषय हैं। बालकनी के हिस्से को भी अस्थायी ढांचे के जरिए कमरे में तब्दील किया गया है। आग जैसी आपात स्थिति में बचाव के पर्याप्त इंतजाम दिखाई नहीं दिए और फायर सेफ्टी मानकों के पालन को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं।
कहीं टूटी दीवारें तो कहीं इमारतों से गिर रहे पत्थर
पड़ताल के दौरान ऐसे और भी पीजी सामने आए, जहां इमारतों की हालत बेहद खराब नजर आई। कहीं दीवारें क्षतिग्रस्त थीं तो कहीं रसोई की व्यवस्था बेहद अव्यवस्थित थी। कुछ जगह गैस सिलेंडर रखने तक के लिए सही जगह नहीं था। एक इमारत से पत्थर गिरने और दूसरी जगह पानी टपकने की समस्या भी सामने आई। एक इमारत की तीसरी मंजिल तक पेड़ उगने की स्थिति भी देखने को मिली। इन हालात के बावजूद सवाल यह है कि ऐसी जगहों पर रहने वाले छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? इमारत मालिक, पीजी संचालक और संबंधित सरकारी एजेंसियां- तीनों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
अंसारी रोड में निर्माणाधीन इमारत को लेकर विवाद
पड़ताल के दौरान टीम दरियागंज के अंसारी रोड की गली नंबर-5 भी पहुंची। यहां एक निर्माणाधीन इमारत की तस्वीर और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर इसे अवैध निर्माण बताया जा रहा है। आरोप है कि जिस स्थान पर गोदाम होना था, वहां कई फ्लैट तैयार किए जा रहे हैं और जरूरी मंजूरियों के बिना निर्माण किया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस ने भी मामले का संज्ञान लिया और निर्माण स्थल पर टीम भेजी।
इमारत के मालिक ने फोन पर दावा किया कि निर्माण के लिए MCD से नक्शा पास कराया गया है। हालांकि, उन्होंने कैमरे पर बात करने से इनकार किया। पुलिस की ओर से मालिक से संबंधित दस्तावेज लिए जा रहे हैं, जबकि MCD से स्वीकृत नक्शे की भी जांच की जा रही है। स्थानीय लोगों ने कैमरे पर बात करने से परहेज किया, लेकिन उनका आरोप है कि निर्माण का कुछ हिस्सा नियमों के खिलाफ किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि इमारत की पिछली दीवार लाल किले के बेहद करीब है और यह इलाका वॉल्ड सिटी के दायरे में आता है। उनका आरोप है कि जिस हिस्से में पार्किंग होनी चाहिए, वहां कमरे बनाए जा रहे हैं। दिल्ली पुलिस के अनुसार, वर्ष 2023 में भी इस निर्माण को लेकर संबंधित सिविक एजेंसियों को पत्र भेजा गया था। अब दोबारा MCD समेत अन्य विभागों को जांच के लिए कहा गया है।
अंसारी रोड की सात मंजिला इमारत पर भी सवाल
अंसारी रोड की गली नंबर-21 में एक और ऊंची इमारत लोगों का ध्यान खींचती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह गली की सबसे ऊंची इमारतों में से एक है और इसमें बेसमेंट भी मौजूद है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब इलाके में स्टिल्ट पार्किंग के साथ प्लस चार मंजिल तक निर्माण की अनुमति होने की बात कही जाती है, तो यह इमारत छह से सात मंजिल तक कैसे पहुंच गई। हालांकि, हमारी टीम इस इमारत को पूरी तरह अवैध घोषित करने का दावा नहीं करती। लेकिन स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों की जांच होना जरूरी है। इसी इलाके में बिजली के तारों का जाल भी दिखाई देता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार शिकायतें कीं और MCD की ओर से कार्रवाई का भरोसा भी दिया गया, लेकिन जमीन पर अपेक्षित कार्रवाई नजर नहीं आई।
हादसे के बाद नहीं, पहले हो कार्रवाई
दिल्ली में हुई इस पड़ताल ने एक बार फिर राजधानी में भवन सुरक्षा, पीजी व्यवस्था, अवैध निर्माण और सरकारी निगरानी को लेकर कई सवाल सामने रखे हैं। अगर किसी इमारत को लेकर पहले से शिकायतें मिल रही हैं या वह असुरक्षित नजर आ रही है, तो कार्रवाई के लिए किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों किया जाए? सत्य निकेतन की घटना के बाद कार्रवाई जरूर हुई, लेकिन असली सवाल यही है कि क्या प्रशासन भविष्य में हादसे होने से पहले ऐसी इमारतों और पीजी की पहचान कर उन पर कार्रवाई करेगा? दिल्ली में ऐसी कितनी इमारतें और पीजी हैं, जहां सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठ रहे हैं- यह पता लगाने और समय रहते कार्रवाई करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
