Ground Report: कहीं दरारें, कहीं झुकी दीवारें तो कहीं पीजी के नाम पर छात्रों की जिंदगी से खिलवाड़; सत्य निकेतन हादसे के बाद सामने आईं चिंताजनक तस्वीरें

Delhi Building Collapse Ground Report: सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली में जर्जर इमारतों, अवैध निर्माण और नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे पीजी को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। टाइम्स नवभारत की टीम ने दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में पड़ताल कर यह जानने की कोशिश की कि आखिर कितनी इमारतें और पीजी सुरक्षा मानकों पर खरे उतर रहे हैं। पड़ताल में सामने आई तस्वीरें सरकारी निगरानी और कार्रवाई के दावों पर सवाल उठाती हैं- क्या प्रशासन हादसे के बाद ही जागेगा या समय रहते भी कोई कदम उठाया जाएगा?

Delhi Building Collapse Ground Report: दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक हादसे ने राजधानी में इमारतों की सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में छात्रों और मजदूरों की जान जाने के बाद उनके परिवार यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर उनकी क्या गलती थी। घटना के बाद सरकार ने लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया, बिल्डिंग मालिक की गिरफ्तारी हुई और कुछ MCD अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन खामियों पर हादसे के बाद कार्रवाई की गई, उन्हें पहले क्यों नहीं सुधारा गया? इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए टाइम्स नाउ नवभारत की टीम ने दिल्ली के अलग-अलग इलाकों का जायजा लिया। पड़ताल का मकसद यह समझना था कि राजधानी में संचालित हो रहे पीजी कितने सुरक्षित हैं, पुरानी इमारतों की स्थिति क्या है और निर्माणाधीन इमारतों में भवन निर्माण से जुड़े नियमों का कितना पालन किया जा रहा है।

Delhi Building Collapse Ground Report

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली की इमारतों की हकीकत बेनकाब

तीमारपुर में झुकी मिली पांच मंजिला इमारत

सबसे पहले टीम तीमारपुर पहुंची। घनी आबादी के बीच स्थित इस इलाके में एक ऐसी इमारत सामने आई, जो देखने में बहुत पुरानी नहीं लगती, लेकिन उसकी स्थिति चिंता पैदा करती है। करीब पांच मंजिला यह इमारत एक तरफ झुकी हुई दिखाई देती है। दो इमारतों के बीच बनी बड़ी दरार भी इसकी स्थिति को लेकर गंभीर आशंका पैदा करती है। इसी परिसर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए लाइब्रेरी भी संचालित होती है, जहां बड़ी संख्या में छात्र पहुंचते हैं।

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