Surat News: सूरत के डिंडोली क्षेत्र में एक मार्मिक और इंसानियत से भरी घटना सामने आई है। तालाब के किनारे लावारिस अवस्था में मिली नवजात बच्ची के लिए पुलिस थाने में पूरे विधि-विधान से छठी और नामकरण संस्कार का आयोजन किया गया। इस दौरान बच्ची का नाम ‘हस्ती’ रखा गया। जहां देश के विभिन्न हिस्सों से पुलिस के अमानवीय व्यवहार की खबरें अक्सर सुर्खियों में रहती हैं, वहीं गुजरात के सूरत की इस घटना ने पुलिस का संवेदनशील और मानवीय पक्ष उजागर किया है। यह भावुक कर देने वाला मामला डिंडोली थाना क्षेत्र के देलाडवा गांव का है, जहां करीब छह दिन पहले तालाब के पास एक नवजात बच्ची बेसहारा हालत में मिली थी। पुलिस ने न सिर्फ उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि एक परिवार की तरह उसकी जिम्मेदारी भी निभाई।
सूरत पुलिस ने लावारिस नवजात का किया छठी और नामकरण संस्कार
चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को सौंपा गई बच्ची
जानकारी के अनुसार सूचना मिलते ही डिंडोली पुलिस मौके पर पहुंची। जिस समय नवजात बच्ची मिली, उस वक्त कड़ाके की ठंड वाली रात थी। इसके बावजूद बच्ची पूरी तरह सुरक्षित थी और उसके चेहरे पर मुस्कान दिखाई दे रही थी। पुलिस ने बिना देर किए उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसकी विस्तृत जांच की और उसे पूरी तरह स्वस्थ बताया। सभी आवश्यक टीकाकरण और मेडिकल प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद बच्ची को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को सौंपा गया।
विधि-विधान से हुआ छठी और नामकरण संस्कार
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि बच्ची को किसने और किन परिस्थितियों में वहां छोड़ा। इसी बीच, बच्ची के छह दिन पूरे होने पर डिंडोली थाना पुलिस ने पुलिस आयुक्त की मौजूदगी में छठी और नामकरण संस्कार का आयोजन किया। इसके लिए थाना परिसर में विधिवत पंडाल लगाया गया और कर्मकांडी ब्राह्मण को आमंत्रित कर हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार पूरे विधि-विधान से कार्यक्रम संपन्न कराया गया।
किसने और क्यों छोड़ा बच्ची को?
नामकरण और छठी संस्कार के बाद मीडिया से बातचीत में पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत ने बताया कि समय रहते सूचना न मिलती तो रात के समय बच्ची के साथ कोई गंभीर हादसा हो सकता था। ग्रामीणों की सतर्कता और पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बच्ची की जान बच सकी। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस बच्ची के नाम से एक बैंक खाता खुलवाने की प्रक्रिया शुरू करेगी, ताकि उसके भविष्य के लिए आर्थिक सहायता सुनिश्चित की जा सके। साथ ही, पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि नवजात को लावारिस हालत में किसने और किस कारण से छोड़ा।
