सोलापुर : चीनी की कीमतों में हालिया उछाल के बीच महाराष्ट्र के सोलापुर में सिद्देश्वर चीनी मिल के बाहर किसानों की लंबी कतार लग गई। मिल परिसर में सभासद किसानों की बड़ी संख्या में भीड़ जुटी है। किसानों को मिल की ओर से प्रति सभासद 50 किलो चीनी दी जा रही है। चीनी वितरण दोबारा शुरू होने की खबर फैलते ही जिले के अलग-अलग हिस्सों से किसान मिल परिसर पहुंचने लगे।
सोलापुर में चीनी मिल के बाहर किसानों की लंबी कतार
बताया जा रहा है कि चीनी के दाम बढ़ने के बाद कुछ समय के लिए मिल में चीनी वितरण रोक दिया गया था। बाद में वितरण दोबारा शुरू होने की जानकारी मिलते ही किसानों की संख्या अचानक बढ़ गई। इसके बाद मिल परिसर में लंबी कतारें लग गईं और व्यवस्था संभालने में प्रशासन को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी।
बढ़ते दामों के बीच मिल से चीनी लेने पहुंचे किसान
बाजार में चीनी महंगी होने के कारण मिल से मिलने वाली चीनी किसानों के लिए राहत का जरिया बन रही है। यही वजह है कि वितरण शुरू होने की सूचना के बाद बड़ी संख्या में सभासद किसान सिद्देश्वर मिल पहुंच गए। भीड़ को नियंत्रित करने और वितरण व्यवस्था बनाए रखने के लिए मिल प्रशासन को अतिरिक्त इंतजाम करने पड़े।
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देशभर में चीनी की कीमतों में भी हाल के हफ्तों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के मुताबिक, औसत खुदरा कीमत 20 जुलाई को ₹48.18 प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त को बढ़कर ₹55.70 प्रति किलो हो गई। सरकार ने कीमतों में तेजी के पीछे घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारी मांग, मौसम से गन्ने की फसल को नुकसान, वैश्विक आपूर्ति में कमी और कुछ स्तरों पर जमाखोरी व सट्टेबाजी को प्रमुख कारण बताया है।
आखिर क्यों महंगी हो रही है चीनी?
इस साल चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण उत्पादन और उपलब्ध स्टॉक के बीच दबाव माना जा रहा है। सरकार के अनुसार, मौजूदा सीजन में चीनी उत्पादन का अनुमान करीब 306 लाख टन है, जबकि शुरुआती अनुमान लगभग 343 लाख टन का था। महाराष्ट्र समेत कुछ प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में अधिक बारिश और गन्ने में रेड रॉट तथा टॉप बोरर जैसी बीमारियों से उत्पादन प्रभावित हुआ है।
इसके अलावा त्योहारी सीजन से पहले चीनी की मांग बढ़ने की आशंका ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चीनी की आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है। सरकार के अनुसार, 2026-27 में वैश्विक चीनी बाजार में करीब 33 लाख टन का संभावित घाटा अनुमानित है।
क्या इथेनॉल भी चीनी महंगी होने की वजह है?
चीनी की कीमतों में उछाल के बीच इथेनॉल को लेकर भी बहस तेज हुई है। गन्ने से इथेनॉल उत्पादन के लिए कुछ मात्रा में चीनी का डायवर्जन होने के कारण यह सवाल उठ रहा है कि क्या इससे घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई है।
हालांकि, केंद्र सरकार ने इस दावे को खारिज किया है। सरकार के मुताबिक, इथेनॉल के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में करीब 12 फीसदी से घटकर 2025-26 में करीब 9 फीसदी रह गया है। सरकार ने यह भी कहा है कि देश में बनने वाले इथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्का, से आता है। इसलिए मौजूदा कीमत वृद्धि को केवल इथेनॉल नीति से जोड़ना सही नहीं होगा।
