दिल्ली के जंतर-मंतर से नीट पेपर लीक मुद्दे और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर उठी आवाज को आज बड़ी कामयाबी मिली है। शनिवार की दोपहर प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। इसे रिजाइन को छात्रों की जीत कहा जा रहा है। लगातार विपक्ष के नेता इसे युवाओं की जीत बता रहे हैं। इस बीच एनसीपी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार ने कहा कि सवाल किसी एक व्यक्ति का नहीं है, बल्कि शिक्षा क्षेत्र में जो कुछ गलत चीजें आ रही थीं, उनका है। शिक्षा क्षेत्र में जो परीक्षाएं होती हैं, जिनमें लाखों लड़के-लड़कियां शामिल होते हैं, अगर उस परीक्षा प्रक्रिया में सुधार नहीं होगा और वहां भ्रष्टाचार होगा, तो इसकी जबरदस्त कीमत नई पीढ़ी को चुकानी पड़ती है।
एनसीपी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार
ऐसे में उनके मन में निराशा पैदा होती है। उन्होंने (छात्रों ने) इस मुद्दे को संसद के अंदर और बाहर कई बार उठाया, लेकिन भारत सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। आखिरकार, जो संघर्ष करने की तैयारी नई पीढ़ी ने की और भारत सरकार ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया था, तो सरकार को यह अंदाजा हो गया कि अगर हम कल वाली राह पर ही चलते रहे, तो हमें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
सरकार को झुकना पड़ा-शरद
इसलिए, छात्रों और उनके नेताओं के साथ जो संवाद हुआ, उसमें शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, जिस पर सरकार बात करने को तैयार नहीं थी, अंततः उन्हें करना पड़ा। सरकार को भी यह संदेश मिला है कि इस नई पीढ़ी ने, जो इसमें शामिल हुई, जबरदस्त एकता दिखाई है। मैं उनका अभिनंदन करता हूँ। और इससे, पुलिस बल या कोई भी लोकतांत्रिक आंदोलन हो, सरकार उसके प्रति समझदारी से व्यवहार करेगी, ऐसी उम्मीद हम भारत सरकार से करते हैं।
प्रधानमंत्री जी से मुलाकात पर उन्होंने कहा कि "यही बात हुई। दूसरी बात किसानों की हुई थी, क्योंकि मैंने उनके सामने यह बात रखी कि महाराष्ट्र में हर तीन घंटे में एक किसान आत्महत्या करता है। विदर्भ और मराठवाड़ा में इस दौरान 2700 से अधिक किसानों ने अपनी जान गंवाई है। इसके लिए इसे नजरअंदाज न करें, यह गंभीर बात है, वे अन्नदाता हैं। उनका इस रास्ते पर जाना किसी सरकार के लिए शोभा नहीं देता।"
12 साल के कार्यकाल में पहला इस्तीफा है, क्या सरकार छात्रों के सामने झुक गई है?
इस पर उन्होंने कहा कि यकीनन यह युवा शक्ति है, इसे हम नजरअंदाज नहीं कर सकते, यह बात भारत सरकार ने स्वीकार की है।
