उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लोगों से 'हलाल सर्टिफिकेशन' वाले उत्पाद नहीं खरीदने के आग्रह के बाद कांग्रेस ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को गोरखपुर में 'विचार-परिवार कुटुम्ब स्नेह मिलन' और 'दीपोत्सव से राष्ट्रोत्सव' कार्यक्रमों में लोगों से आग्रह किया था कि वे 'हलाल सर्टिफिकेशन' वाले उत्पाद ना खरीदें क्योंकि इस प्रमाणन से मिलने वाला धन आतंकवाद, धर्मांतरण और कथित 'लव जिहाद' की गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाता है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा सरकार पर आर्थिक और रोजगार के मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।
हलाल प्रमाणन पर सीएम योगी के बयान पर कांग्रेस भड़की
अजय राय ने वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया
पीटीआई-भाषा से बात करते हुए अजय राय ने कहा, यह सरकार वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने में माहिर है। मुख्यमंत्री ऐसे मामलों पर इतना ध्यान क्यों केंद्रित कर रहे हैं? हम मांग करते हैं कि सरकार 2017 से अब तक उत्तर प्रदेश में आए निवेश और उससे पैदा हुए रोजगार के आंकड़े जारी करे। इन पर ध्यान देने के बजाय मुख्यमंत्री हलाल सर्टिफिकेशन की बात करना ज्यादा पसंद करते हैं। इस बीच, ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने आदित्यनाथ के बयान की तरफदारी करते हुए कहा कि हलाल प्रमाणपत्र जारी करने का तरीका शरीयत के हिसाब से बिल्कुल गलत है।
उन्होंने दावा किया, धन कमाने के लिए धर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, रजवी ने यह भी कहा कि वह मुख्यमंत्री की इस बात से सहमत नहीं हैं कि हलाल प्रमाणन से मिले धन का इस्तेमाल आतंकवाद को पोषित करने के लिए किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के बयान ने हलाल-प्रमाणित खाद्य उत्पादों पर रोक लगाने के राज्य के पूर्व के फैसले पर फिर से बहस छेड़ दी है। राज्य के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने 18 नवंबर 2023 को एक अधिसूचना जारी करके प्रदेश में हलाल प्रमाणन वाले खाद्य पदार्थों के उत्पादन, भंडारण, बिक्री और वितरण पर रोक लगा दी थी। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं।
तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में रखी थी दलील
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि हलाल प्रमाणन का दायरा सीमेंट, सरिया, आटा और बेसन जैसे गैर-मांस उत्पादों तक बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया था कि नास्तिकों को ऐसे उत्पादों के लिए ज्यादा कीमत क्यों चुकानी चाहिए। उन्होंने कहा था कि हलाल प्रमाणपत्र देने वाली एजेंसियां इसके लिये भारी रकम वसूल रही हैं। वहीं, याचियों की दलील थी कि हलाल प्रमाणपत्र लेना पूरी तरह से ऐच्छिक होने के साथ-साथ उपभोक्ताओं की पसंद का मामला है।
केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा था कि यह मामला उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है और इसमें वाणिज्य मंत्रालय की कोई भूमिका नहीं है। इसमें यह भी कहा गया था कि एक याची के खिलाफ जाली प्रमाणपत्र जारी करने के आरोप में लखनऊ में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने बाद में 'हलाल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' और 'जमीयत उलेमा-ए-हिंद हलाल ट्रस्ट' द्वारा दायर याचिकाओं पर उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य पक्षों से जवाब मांगा था और निर्देश दिया था कि प्राथमिकी के संबंध में ट्रस्ट के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
