इस उमस को हल्के में मत लेना! लखनऊ में बदल रहा गर्मी का पैटर्न, उमस बढ़ा रही हीट स्ट्रोक का खतरा

लखनऊ में बढ़ती गर्मी के साथ उमस भी गंभीर हो रही है। CEEW के मुताबिक, 2015-2024 के बीच 289 दिन तापमान 35°C से अधिक और नमी 60% से ज्यादा रही। 2050 तक ऐसे हालात से सालाना करीब 4,000 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ दिन-ब-दिन एक नए तरीके के ’हीट स्ट्रेस’ से जूझ रही है। एक ऐसी मुश्किल स्थिति, जिसमें चढ़ता तापमान बढ़ती उमस के साथ जुड़कर शहर के लोगों को ऐसी गर्मी का एहसास करा रहा है, जिसे किसी थर्मोमीटर से नहीं नापा जा सकता। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) के 2015 से 2024 के मौसम संबंधी दैनिक आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, अगर उमस भरी गर्मी का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो 2050 तक लखनऊ में हर साल ऐसी गर्मी से 4000 लोगों की मौत हो सकती है।

Lucknow Heat

गर्मी से ज्यादा उमस बनी मुसीबत, लखनऊ में तेजी से बढ़ रहा हीट रिस्क (सांकेतिक फोटो)

ग्लोबल वार्मिंग और भौगोलिक स्थिति बढ़ा रही उमस

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के पूर्व महानिदेशक डॉक्टर के. जे. रमेश ने बताया कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से तापमान में बढ़ोत्‍तरी हुई है। साथ ही सिंधु-गंगा के मैदानी इलाकों में नमी के स्तर में भी अपेक्षाकृत काफी इजाफा हुआ है। उन्होंने कहा, "लखनऊ सिंधु-गंगा के मैदानों के बीचो-बीच बसा है। इस इलाके की कम ऊंचाई और बेसिन जैसी भौगोलिक बनावट के चलते हवा ठहरी रहने की वजह से नमी बरकरार रहती है। नमी का ऊंचा स्तर उमस भरी गर्मी के असर को और बढ़ा देता है जिससे सेहत से संबंधित जोखिम खासकर सांस और गर्मी से जुड़ी बीमारियां बढ़ जाती हैं।"

End of Feed