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Rewa News: कागजों पर गौशाला, जमीन पर खंडहर! 38 लाख के घोटाले में इंजीनियरों और ठेकेदार पर EOW का शिकंजा

Rewa News: रीवा जिले के डभौरा में मनरेगा के तहत बनने वाली गौशाला में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। बिना कोई ठोस निर्माण कार्य कराए ही कागजों पर लाखों रुपये का भुगतान करा लिया गया।

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मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार की हदें पार

Photo : Times Now Digital

Rewa News: मध्य प्रदेश के रीवा जिले में गौशाला निर्माण के नाम पर एक बड़ा और चौंकाने वाला वित्तीय फर्जीवाड़ा सामने आया है। मनरेगा योजना के तहत निराश्रित गोवंश की देखभाल के लिए स्वीकृत किए गए लाखों रुपये बिना कोई ठोस काम कराए ही डकार लिए गए। इस मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए संबंधित इंजीनियरों और ठेकेदार समेत कुल 6 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जैसे-जैसे इस पूरे मामले की जांच का दायरा आगे बढ़ेगा, आरोपियों की संख्या और भी बढ़ने की पूरी संभावना जताई जा रही है।

यह पूरा मामला रीवा जिले के डभौरा यूनिट नंबर-3 का है। यहां मनरेगा के तहत करीब 37 लाख 85 हजार रुपये की लागत से एक आधुनिक गौशाला बनाई जानी थी। इस प्रोजेक्ट में गौशाला भवन, बछड़ा शेड, भूसा गोदाम, बीमार गायों के लिए शेड, नलकूप, पानी की टंकी, बाउंड्रीवॉल और जमीन का समतलीकरण जैसे तमाम जरूरी काम शामिल थे। हालांकि, जब इस योजना की शिकायत मिलने के बाद जमीनी स्तर पर जांच की गई, तो टेंडर प्रक्रिया से लेकर निर्माण कार्य तक भारी गड़बड़ियां उजागर हुईं।

नियमों को ताक पर रख चहेते सप्लायर को फायदा

जांच के अनुसार, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक-2 रीवा के तत्कालीन अधिकारियों ने पूरी पारदर्शिता को ताक पर रखकर छतरपुर के एक चहेते सप्लायर 'मेसर्स दीनदयाल कुशवाहा' को फायदा पहुंचाने की साजिश रची। नियमों के विरुद्ध जाकर एक ही काम के लिए दिसंबर 2020 में अलग-अलग तारीखों में संक्षिप्त निविदाएं तैयार की गईं।

हैरानी की बात यह है कि बिना निविदा शुल्क और अमानत राशि जमा कराए ही उस सप्लायर को न्यूनतम दर (L-1) वाला बताकर काम सौंप दिया गया। इसके बाद फर्जी बिलों के सहारे मनरेगा पोर्टल पर 27 लाख 38 हजार रुपये से अधिक का दावा ठोक दिया गया और इसमें से 20 लाख 22 हजार रुपये से ज्यादा का भुगतान भी चुपचाप करा लिया गया।

जमीन पर नहीं मिली गौशाला

जब अधिकारियों ने मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन किया, तो कागजों पर चल रही गौशाला जमीन पर गायब मिली। वहां केवल एक अधूरी बाउंड्रीवॉल और एक अधूरा भवन खड़ा मिला, जबकि नलकूप, पानी की टंकी और शेड का दूर-दूर तक कोई नामोनिशान नहीं था। सरकारी धन के इस खुलेआम दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के खुलासे के बाद से इलाके में हड़कंप मच गया है।

Makarand Kale
मकरंद कालेauthor

सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ।\nततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि\n\nसाल 2008 में by chance journalist बना। 2013 से by choice journalist हूं। कहते हैं ना कि अच्छे काम में पहले बहुत परेशानियां आती हैं। और बाद में उसी की आदत पड़ जाती है।

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