Rajasthan News: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वर्तमान भाजपा सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों को अपने बेटों को सरकारी मामलों से दूर रखना चाहिए। उन्होंने चेताया कि परिवार का बढ़ता दखल सरकार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकता है। जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में गहलोत ने बताया कि प्रदेश में भाजपा सरकार के कार्यकाल में मंत्रियों के बेटों का सरकारी कामकाज में हस्तक्षेप बढ़ गया है और उन्होंने पूछा कि आखिर उन्हें इस तरह के कामों में क्यों शामिल किया जा रहा है।
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (फोटो: पीटीआई)
"सत्ता के करीब लाने से वे बिगड़ सकते"
अशोक गहलोत ने कहा कि बेटों को सत्ता के करीब लाने से वे बिगड़ सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि परिवार के सदस्यों को सरकारी कामकाज से दूर रखते हुए सही संस्कार और जिम्मेदारी की समझ दी जानी चाहिए, ताकि वे विवादों से बच सकें। पूर्व मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि कोई भी गलत कदम सरकार और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा कि बेटों के कारण बदनामी मुख्यमंत्री और सरकार दोनों की हो सकती है। गहलोत ने कहा कि प्रदेश में चर्चा है कि मंत्रियों के परिवार के सदस्य सरकारी कार्यों में हस्तक्षेप कर रहे हैं और इसे लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए उचित नहीं बताया।
राजस्थान की कानून व्यवस्था पर कहा ये
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो जाने का दावा करते हुए आरोप लगाया कि राज्य में अपराध कम दिखे, इसके लिए आंकड़ों की ’जादूगरी’ की जा रही है। गहलोत ने कानून व्यवस्था की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर कहा कि,’’कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह चौपट हो चुकी है। हाल में नदबई में भी एक हत्या हुई है। आखिर ये लोग और कितनी हत्याएं करवाएंगे? मुझे समझ में ही नहीं आता कि सरकार आखिर समझ क्यों नहीं पा रही है।’’ कई घटनाओं का जिक्र करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा,’’एक ही महीने में पांच-सात हत्याएं हो चुकी हैं।
राजस्थान में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं बची है।’’ उन्होंने आगे कहा कि आज गांवों में अत्याचार, अन्याय और उत्पीड़न की जो घटनाएं हो रही हैं, उनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती, कई मामलों की जानकारी बाहर नहीं आ पाती है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के समय प्राथमिकी दर्ज करना अनिवार्य था, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे समाप्त कर दिया, जिससे वास्तविक स्थिति का पता लगाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंकड़ों को इस तरह पेश किया जा रहा है कि कम से कम मामले ही सामने आएं। वहीं, वर्तमान सरकार द्वारा पूर्व कांग्रेस सरकार की परियोजनाओं को ठंडे बस्ते में डालने और सोशल मीडिया पर चल रही ‘इंतजारशास्त्र’ सीरीज पर टिप्पणी करते हुए गहलोत ने कहा कि यह अभियान सरकार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से चलाया गया है।
