Punjab Roadways Strike News: पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और रोडवेज कर्मियों का आंदोलन तेज होता जा रहा है। पंजाब रोडवेज, पनबस और PRTC के कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक बार फिर अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है। वहीं, पंजाब एम्प्लॉइज एंड पेंशनर्स जॉइंट फ्रंट और अन्य सरकारी कर्मचारी संगठनों ने भी आज गुरुवार 21 और 22 अक्टूबर को सामूहिक छुट्टी व हड़ताल की घोषणा की है। इससे राज्य में सरकारी कामकाज के साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है।
पंजाब में रोडवेज कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर
पठानकोट बस डिपो में हड़ताल के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। यहां से आज सुबह सिर्फ दो बसें रवाना हो सकीं, जिनमें एक चंडीगढ़ और दूसरी अमृतसर के लिए थी। डिपो के 82 से ज्यादा बस रूट प्रभावित हुए। यूनियन के अनुसार, कर्मचारियों की बेहद कम उपस्थिति के कारण बस संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप, डिपो में धरना
पंजाब रोडवेज, पनबस और PRTC कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के सदस्यों ने अपनी मांगों को लेकर बस डिपो में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। यूनियन के कैशियर विजय और प्रदेश नेता जगदीश्वर सहित अन्य पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार ने 15 अक्टूबर को कर्मचारियों के साथ अहम और अंतिम बैठक तय की थी, लेकिन निर्धारित बैठक नहीं हुई और सरकार ने उनसे बातचीत भी नहीं की।
यूनियन नेताओं का कहना है कि सरकार के इस रवैये से नाराज होकर कर्मचारियों को हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मांगों पर ठोस समाधान निकलने तक आंदोलन जारी रहेगा।
रोडवेज कर्मचारियों की मांगें क्या हैं?
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को नियमित करना, आउटसोर्सिंग के तहत काम करने वाले कर्मचारियों को विभागीय कॉन्ट्रैक्ट पर लाना और आंदोलन के दौरान जेल में बंद साथियों को रिहा करना शामिल है। यूनियन ने कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज पुलिस मामलों को भी रद्द करने की मांग की है।
नेताओं ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लेती, तब तक हड़ताल और धरना समाप्त नहीं किया जाएगा।
जालंधर में भी सरकारी कर्मचारियों का आंदोलन
इस बीच, पंजाब एम्प्लॉइज एंड पेंशनर्स जॉइंट फ्रंट और दूसरे सरकारी कर्मचारी संगठनों ने जालंधर में सामूहिक छुट्टी और हड़ताल का ऐलान किया है। कर्मचारी नेता तजिंदर पाल सिंह के मुताबिक, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अक्टूबर की शुरुआत में कर्मचारियों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं का समाधान करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक बैठक नहीं हुई।
कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि 21 और 22 अक्टूबर को हड़ताल के बाद भी मांगें नहीं मानी गईं, तो बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। ऐसे में पंजाब सरकार के सामने कर्मचारियों की मांगों पर बातचीत शुरू करने और परिवहन सहित जरूरी सेवाओं पर पड़ रहे असर को कम करने की चुनौती है।
