'युद्ध नशेआं विरुद्ध': नशे के खिलाफ पंजाब की जंग तेज, सरकारी डी-एडिक्शन सेंटर में दाखिले 164% बढ़े

पंजाब में मार्च 2025 में शुरू किए गए ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के बाद उपचार सुविधाओं तक पहुंचने वाले लोगों की संख्या में तेजी आई है। सरकार का कहना है कि यह बढ़ोतरी नशे की समस्या से प्रभावित लोगों और उनके परिवारों के बीच सरकारी उपचार व्यवस्था में बढ़ते भरोसे का संकेत है।

पंजाब में ‘‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान को बड़ी सफलता मिलती दिख रही है। इस अभियान के तहत संचालित किए जा रहे सरकारी नशा मुक्ति और रिहैबिलिटेशन केंद्रों में मरीजों के भर्ती होने की संख्या में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में नशा मुक्ति केंद्रों में 9,577 लोग दाखिल हुए थे। यह संख्या 2025 में बढ़कर 25,290 हो गई, यानी एक साल में 164 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई। वर्ष 2026 में भी यह रुझान जारी है और जुलाई तक 14,000 से अधिक लोग सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिला ले चुके हैं।

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पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह।

मार्च 2025 में शुरू किए गए ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के बाद उपचार सुविधाओं तक पहुंचने वाले लोगों की संख्या में तेजी आई है। सरकार का कहना है कि यह बढ़ोतरी नशे की समस्या से प्रभावित लोगों और उनके परिवारों के बीच सरकारी उपचार व्यवस्था में बढ़ते भरोसे का संकेत है।

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