राजधानी पटना के गंगा किनारे स्थित सभ्यता द्वार लोगों के आकर्षण का बड़ा केंद्र बन गया है। यहां का खूबसूरत पार्क, शांत माहौल और गंगा की कलकल करती लहरें लोगों अपनी ओर खींच लाती हैं। वैसे तो बिहार में घूमने के लिए बहुत सी जगहें हैं, लेकिन सभ्यता द्वार की अपनी अलग पहचान है। यह जगह टूरिस्टों के बीच काफी पॉपुलर है। नई दिल्ली के इंडिया गेट और मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया के अनुरूप पटना के सभ्यता द्वार बनाया गया है। आइए सभ्यता द्वार के बारे में जानते हैं।
पटना, सभ्यता द्वार
बिहार का यह द्वार गांधी मैदान के उत्तर और अशोका इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर परिसर के पीछे बना हुआ है। आज यह द्वार बिहार का लैंड मार्क बन गया है। बिहार के इस सभ्यता द्वार की खूबसूरती लोग निहारते रह जाते हैं। इसके एक ओर सम्राट अशोक और महात्मा बुध तो दूसरी तरफ महावीर और मेगास्थनीज की वाणी को अंकित किया गया है। इसे बलुआ पत्थर आर्क से बनाया गया है। सभ्यता द्वार के शीर्ष पर चार शेर वाला अशोक स्तंभ भी है।
सभ्यता द्वार की खासियत
बिहार के इस द्वार पर आने से एक अद्भुत शांति का अहसास होता है। वहीं यहां का पार्क भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। शाम के समय रंग-बिरंगी खूबसूरत लाइटिंग में सराबोर यह जगह मन को मोह लेती है। लगभग पांच करोड़ रुपए की लागत से 32 मीटर ऊंचे और 8 मीटर चौड़े सभ्यता द्वार का निर्माण किया गया है। बाताया जाता है कि यह मुंबई के गेट वे ऑफ इंडिया 26 मीटर से भी 6 मीटर और पटना के गोलघर 29 मीटर से 3 मीटर ज्यादा ऊंचा बनाया गया है।
साल 2018 में किया गया तैयार
सभ्यता द्वार का पूरा परिसर एक एकड़ में बनाया गया है। यहां शाम के समय बजने वाला म्यूजिक लोगों के मन को सुकून देता है। आपको बता दें कि यहां घूमने के लिए आपको कोई चार्ज भी नहीं देना होता। इस द्वार से बिहार की खूबसूरती नजर आती है। 1 दिसंबर, 2018 को इस द्वारा का उद्घाटन किया गया था। आप सभ्यता द्वार में सुबह 11 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक कभी भी घूमने जा सकते हैं।
