Bihar Flood: बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। बिहार के आधे से अधिक जिलों में बाढ़ से तबाही मच सकती है। खासकर उत्तर बिहार के 20 से अधिक जिलों में बाढ़ को लेकर खराब स्थिति बनी हुई है। बिहार और नेपाल में हो रही जोरदार बारिश की वजह से खतरा और भी बढ़ ही रहा है। नेपाल में बीते दिन हुई झमाझम बारिश की वजह से कोसी और गंडक का जलस्तर फिर से बढ़ गया। रविवार को कोसी और गंडक बराज से 6.5 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। बता दें कि 1968 के बाद से यह सबसे अधिक पानी है, जो छोड़ा गया है।
फाइल फोटो।
अगले 60 घंटे में दिखेगा असर
बिहार के कोसी-सीमांचल इलाके के लोगों में डर का माहौल है। कई जिलों में बाढ़ का पानी फैल गया है। खासकर रिहायशी इलाकों में भी पानी घुस गया है, जिस वजह से आने वाले कुछ घंटों में खतरा बढ़ सकता है। बाढ़ विशेषज्ञों ने बताया है कि बिहार के कई जिलों में अगले 60 से 70 घंटों में तबाही का मंजर दिख सकता है। इधर, पश्चिम चंपारण के बगहा में बांध टूटने से हाहाकार मच गया है। आस पास के लोगों के लिए अपने घरों में रहना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
आधा दर्जन से अधिक बांध टूटे
बता दें कि बैराज से पानी का बहाव इतना तेज है कि एक ही दिन में बिहार में आधा दर्जन से अधिक बांध टूट गए हैं। इससे निचले इलाके में पानी फैल गया है। सुपौल में कोसी नदी का रौद्र रूप दिखा है, जिससे हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं। कहा जा रहा है कि इस इलाके में 56 साल के बाद ऐसा तबाही का मंजर दिखा है। घरों में पानी प्रवेश करते ही लोग ऊंचे स्थानों की ओर रुख करने लगे हैं। इलाके के लोगों का कहना है कि ऐसा मंजर 1968 में दिखा था, जब बाढ़ ने तबाही मचाई थी।
राहत बचाव के लिए टीमें तैनात
वहीं, किसी भी खतरे से निपटने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 16 टीमें तैनात की गई है। इन टीमों को बाढ़ प्रभावित जिलों में तैनात किया गया है, ताकि जरूरत पड़ने से किसी भी मुसीबत से निपटा जा सके। इनमें सबसे अधिक सुपौल में चार टीमें तैनात की गई हैं। वहीं, सहरसा में तीन टीमें भेजी गई हैं। उधर, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने बाढ़ के हालात से निपटने के लिए एनडीआरएफ के साथ बैठक की है और राहत बचाव को लेकर निर्देश दिए हैं।
