Ram Raja Mandir Orchha: भारत अपनी समृद्ध परंपराओं और गहरी सांस्कृतिक जड़ों के लिए जाना जाता है। संस्कृति के प्राण रूप में आज भी पूरे भारतवर्ष में भगवान राम का नाम स्वाभाविक रूप से सबसे पहले लिया जाता है। अयोध्या से लंका तक का अद्भुत और प्रेरणादायक सफर ही महाराज दशरथ के बड़े पुत्र राजकुमार राम को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम बना देता है। युग बीत गए, समय बदल गया, लेकिन राम का नाम आज भी जन्म से लेकर जीवन के अंतिम पड़ाव तक भारतीय समाज में उतनी ही आस्था के साथ गूंजता है। देश के कई शहर आज भी रामायणकालीन धरोहरों को संजोए हुए हैं। इन्हीं में से एक है मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक शहर ओरछा।
इस शहर में राजा की तरह पूजे जाते हैं भगवान राम
राजा राम मंदिर ओरछा (फोटो: Incredible India)
ओरछा की सबसे खास बात यह है कि यहां भगवान राम को किसी मंदिर के देवता की तरह नहीं, बल्कि एक राजा के रूप में पूजा जाता है। यहां के परंपरागत प्रणालियों में भगवान “श्रीराम राजा सरकार” राज्य के वास्तविक राजा माने जाते हैं। यही कारण है कि पूरे शहर में वीआईपी का दर्जा सिर्फ और सिर्फ राजा राम को ही प्राप्त है। भारत में यह एकमात्र स्थान है जहां भगवान श्रीराम को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर और सशस्त्र सलामी दी जाती है, वही सम्मान जो आमतौर पर किसी सम्राट या राष्ट्रप्रमुख को दिया जाता है। ओरछा इस अनोखी परंपरा को आज भी उसी गरिमा और आस्था के साथ निभाता है, जिससे यह स्थान भारतीय सांस्कृतिक धरोहर में और भी अधिक खास बन जाता है। ऐसे में आज हम आपको इस जगह और राजा राम को गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने की प्रथा के बारे में बताएंगे।
कब से चली आ रही है गार्ड ऑफ ऑनर देने की प्रथा?
ऐसा कहा जाता है कि साल 1600 में बुंदेला राजा माकुर शाह की पत्नी, महारानी कुंअरि, भगवान गणेश और भगवान राम की प्रतिमाएं अयोध्या से ओरछा लेकर आई थीं। उस समय भगवान राम ने शर्त रखी थी कि ओरछा में केवल उनका ही राज चलेगा, न कि किसी राजा का। इस शर्त को मानते हुए महाराजा माकुर शाह ने ओरछा में 'राम राज्य' की स्थापना की और राम राजा मंदिर बनवाया। उनके शासनकाल से ही चारों पहरों में भगवान राम की आरती के दौरान उन्हें विशेष 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया जाता रहा। यह परंपरा आज भी जारी है और मध्य प्रदेश सरकार की पुलिस ओरछा के मंदिरों में आरती के समय सुरक्षा के साथ गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान करती है। ओरछा एक प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में जाना जाता है, जहां देशभर से श्रद्धालु पूजा अर्चना और इसकी भव्यता को देखने के लिए आते हैं।
ओरछा का किला
राम राजा मंदिर की भव्यता
भारत के ओरछा शहर के केंद्र में स्थित राम राजा मंदिर एक अत्यंत पवित्र स्थल है, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों को अपनी ओर खींचता है। इस मंदिर का वातावरण शांत और सुकून देने वाला है। राम राजा मंदिर की वास्तुकला राजपूत और मुगल शैलियों का सुंदर मिश्रण प्रस्तुत करती है। इसके गुंबद, बुर्ज, नक्काशी और मूर्तियां बहु-स्तरीय संरचना में अद्भुत कला कौशल का परिचय देती हैं। ओरछा मंदिर, जिसे आमतौर पर ओरछा मंदिर भी कहा जाता है, सफेद, गुलाबी और पीले रंगों में रंगीन और भव्य है, और यह शहर की प्रमुख आकर्षण स्थलों में से एक है।
ओरछा का क्या मतलब है?
बेतवा नदी के किनारे स्थित ओरछा एक ऐतिहासिक द्वीप है, जिसकी स्थापना बुंदेला राजा ने की थी। 15वीं शताब्दी में, जब बुंदेलखंड के शासकों को उनकी राजधानी गढ़कुंडार से निकाल दिया गया, तब उन्होंने अपने राजवंश को पुनर्स्थापित करने के लिए नई जगह की तलाश शुरू की। "ओरछा" का अर्थ है "छिपा हुआ", और इसे राजा रुद्र प्रताप ने बसाया। राजा को इस घने जंगलों वाले द्वीप और इसके चारों ओर बहती शांत बेतवा नदी से बहुत आकर्षण हुआ। उन्होंने यहीं अपनी नई राजधानी बसाने, महल बनाने और शासन स्थापित करने का निर्णय लिया।
