Noida News: नोएडा के सेक्टर 150 में युवराज मेहता की पानी से भरे खुले गड्ढे में गिरने से मौत हो गई थी। 16 जनवरी 2026 की उस घटना में इंजीनियर युवराज की मौत ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद लग रहा था कि प्रशासन सख्त और मुस्तैद होगा और फिर ऐसी घटनाएं नहीं होंगी। लेकिन लगता है प्रशासन से इंजीनियर युवराज मेहता की मौत से कोई सबक नहीं सीखा। तभी तो आज फिर ऐसी ही एक घटना सामने आई है।
नोएडा में सेक्टर 122 पर्थला गोलचक्कर के पास नाला खुला ही छोड़ दिया गया है। यह खुला नाला हादसों को खुली दावत है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के रिटायर्ड वैज्ञानिक इस खुले नाले में गिरकर घायल हो गए। हालांकि, गनीमत यह रही कि लोगों ने उन्हें समय पर बार निकाल लिया और एक बड़ा हादसा होने से टल गया।
दरअसल पर्थला गोलचक्कर के पास खुला नाला है। कायदे से इस नाले को ढका होना चाहिए, लेकिन इसे खुला ही छोड़ दिया गया है। आज यहां अपनी पत्नी के साथ सड़क पर पैदल चल रहे रिटायर्ड वैज्ञानिक के साथ हादसा हो गया। वो तो भला हो कि उस समय उनके साथ उनकी पत्नी थी और आसपास लोग भी मौजूद थे। अगर कोई छोटा बच्चा होता और वहां आसपास मदद करने वाला कोई नहीं होता तो किसी की जान जा सकती थी।
नाले को तो बंद नहीं किया, लेकिन प्रशासन ने यहां न तो बैरिकेटिंग की है और न ही किसी तरह का कोई चेतावनी बोर्ड लगाया है। ताकि लोग सचेत हो जाएं। ऐसे में यह नाला हादसों को खुला निमंत्रण नहीं तो क्या है>
गौरतलब है कि करीब 6 महीने पहले नोएडा सेक्टर 150 में इंजीनियर युवरात मेहता (Yuvraj Case) की कार रात को पानी से भरे एक खुले गड्ढे में गिर गई थी। युवराज को समय पर मदद नहीं मिली और उसकी दर्दनाक मौत हो गई थी। तब SIT रिपोर्ट ने युवराज की मौत के लिए पुलिस कंट्रोल रूम स्तर पर गंभीर लापरवाही को जिम्मेदार माना था।
रिपोर्ट के आधार पर असिस्सटेंट रेडियो ऑफिसर और रिजर्व सब इंस्पेक्टर सहित तीन कर्मचारियों को दोषी पाया गया और उन्हें निलंबित कर विभागीय कार्रवाई की गई। लेकिन खुले गड्ढे और उसमें पानी भरे होने के बावजूद कार्रवाई नहीं करने के लिए नोएडा अथॉरिटी को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया और आज नाला खुला रखने पर भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
