नोएडा में खतरनाक हवा का कहर, फेफड़ों की बीमारी समेत हार्ट अटैक का मंडराया खतरा; रेड जोन में पहुंचा AQI

नोएडा की हवा खतरनाक स्तर तक प्रदूषित हो चुकी है, और शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बना हुआ है। इससे लोगों को सांस लेने में परेशानी, खांसी, आंखों में जलन और एलर्जी जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि ठंड और प्रदूषण के बढ़ते प्रभाव से स्थिति और गंभीर हो सकती है।

Noida Air Pollution: नोएडा की हवा गंभीर रूप से प्रदूषित हो चुकी है। ठंडी हवाओं और तापमान में गिरावट के बीच शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार रेड जोन में बना हुआ है, जो 250 से 300 के बीच दर्ज किया जा रहा है और ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इस स्थिति का आम लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ रहा है। सांस लेने में कठिनाई, खांसी, आंखों में जलन और एलर्जी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। जिला अस्पताल में भी ओपीडी मरीजों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। अस्पताल के सीएमएस डॉ. अजय राणा के अनुसार, प्रदूषण और ठंड के कारण लोगों की सेहत पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ रहा है। ओपीडी में मरीजों की संख्या में 30 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई है। सर्दियों में ठंडी हवा जमीन के पास दब जाती है, जिससे प्रदूषक तत्व जमा हो जाते हैं और लंग डिजीज, कार्डियोवैस्कुलर समस्याएं, अस्थमा, एलर्जी और साइनस जैसी बीमारियों के मामले बढ़ जाते हैं।

Noida Air Quality Hits Hazardous Levels (Symbolic Photo: Canva)

नोएडा में हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंची (प्रतीकात्मक फोटो: Canva)

फेफड़ों पर गंभीर असर

डॉ. राणा के अनुसार, हवा में मौजूद 2.5 माइक्रोमीटर से भी छोटे कण सीधे फेफड़ों में प्रवेश कर जाते हैं और शरीर की आंतरिक प्रणाली पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रदूषण केवल सांस संबंधी बीमारियों को बढ़ावा नहीं देता, बल्कि यह कैंसर के खतरे को भी बढ़ा सकता है। हवा में मौजूद कुछ तत्व म्यूटेशन का कारण बन सकते हैं, जिससे फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित लोगों की स्थिति और गंभीर हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार व्यक्तियों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। यदि बाहर जाना जरूरी हो, तो मास्क पहनना अनिवार्य है।

End of Feed