नासिक में सिंहस्थ कुंभमेले के भव्य आयोजन की तैयारियां तेज हो गई हैं। रामकुंड परिसर में 51 फीट ऊंचा और 3 हजार 955 किलो वजनी भव्य सुवर्णरंगी ध्वजस्तंभ बनकर तैयार है। 31 अक्टूबर को होने वाले ध्वजारोहण समारोह के लिए इस ध्वजस्तंभ को सज्ज किया गया है। खास बात यह है कि इस ध्वजस्तंभ की कलाकृति में समुद्र मंथन की पौराणिक संकल्पना और हिंदू धर्म के चौदह रत्नों की झलक देखने को मिलती है।
मकर वाहन, जलकुंभ, महावीर हनुमान, गरुड़, भगवान गणेश, सिंह, गुरु बृहस्पति, चंद्रमा और सूर्य जैसे धार्मिक प्रतीकों से इसकी भव्यता को खास रूप दिया गया है।
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आकर्षक नक्काशी, धार्मिक प्रतीकों और पौराणिक परंपराओं का अनूठा संगम इस ध्वजस्तंभ को विशेष बनाता है। सिंहस्थ कुंभमेले की भव्यता में चार चांद लगाने वाला यह ध्वजस्तंभ नाशिक की आध्यात्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक बनेगा। फिलहाल, 31 अक्टूबर को होने वाले ध्वजारोहण समारोह को लेकर श्रद्धालुओं में उत्सुकता बनी हुई है।
नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला महाराष्ट्र के बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक
नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला 2027 महाराष्ट्र के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है। इसमें श्रद्धालु गोदावरी नदी में पवित्र स्नान करते हैं, जबकि विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत शाही स्नान, शोभायात्राओं और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। प्रशासन ने इसकी तैयारियां तेज कर दी हैं।अगस्त-सितंबर 2027 के दौरान तीन प्रमुख स्नान पर्व निर्धारित करने की योजना है। इन दिनों श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ जुटने की संभावना है।
नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ के लिए ₹22,425.39 करोड़ की विकास योजना को मंजूरी
महाराष्ट्र सरकार ने 13 मार्च 2026 की बैठक में नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ के लिए ₹22,425.39 करोड़ की विकास योजना को मंजूरी दी थी। इसमें आयोजन से जुड़ी आधारभूत सुविधाओं और विकास कार्यों की योजना शामिल है। प्रशासन की प्राथमिकताओं में सड़कें, घाट, पानी, स्वच्छता, सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और भीड़ नियंत्रण शामिल हैं।
सेक्टरों की पहचान कराने वाली साइनबोर्ड व्यवस्था लागू करने की तैयारी
हालिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन कुंभ क्षेत्र में रंगों के आधार पर रास्तों और सेक्टरों की पहचान कराने वाली साइनबोर्ड व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को प्रवेश, निकास, पार्किंग और अपने निर्धारित क्षेत्र तक पहुंचने में मदद करना है। प्रमुख स्नान के दिनों में भीड़ के हिसाब से सेक्टरों के बीच आवाजाही पर प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है
