NASA की नौकरी छोड़ संन्यास मार्ग पर निकले साइंटिस्ट प्रद्युम्न भगत; गोल्ड स्कॉलर खिताब विजेता ने क्यों किया ये चुनाव?

प्रद्युम्न ने केवल 15 वर्ष की आयु में TEDx मंच पर अपनी आवाज़ उठाई और गोल्ड स्कॉलर के खिताब से नवाज़े गए। इसके अलावा, उन्होंने दो पेटेंट भी प्राप्त किए, जो उनकी नवप्रवर्तनशीलता को दर्शाते हैं। अब, इस प्रतिभाशाली युवा ने बीएपीएस के संन्यासी बनने का मार्ग चुना है।

मुंबई: जीवन का सत्य क्या है? ये बहुत कम ही लोग समझ पाते हैं, लेकिन जिसे भी समय रहते इसका ज्ञान हो जाता है वो शोहरत, रुपये, लग्जरी लाइफ छोड़कर भक्ति के मार्ग पर निकल पड़ता है। वर्तमान में हम सभी ने कई ऐसे युवाओं को देखा है, जिन्होंने करोड़ों की नौकरी छोड़कर सन्यास के रास्ते पर बढ़ चले। उनमें से एक हैं नासा के साइंटिस्ट प्रद्युम्न भगत। प्रद्युम्न भगत की यात्रा एक उच्च उद्देश्य का प्रमाण है, जो आध्यात्मिकता, भक्ति और निःस्वार्थ सेवा में निहित है। उन्होंने बीएपीएस (बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामिनारायण संस्था) के माध्यम से सेवा की, जो एक विश्वस्तरीय हिंदू संगठन है।

NASA Scientist Pradyuman Bhagat

न्यूज़ीलैंड में जन्में प्रद्युम्न

प्रद्युम्न का जन्म ऑकलैंड, न्यूज़ीलैंड में हुआ। उन्होंने इलेक्ट्रिकल एवं रोबोटिक्स इंजीनियरिंग में अटलांटा में उत्कृष्टता प्राप्त की। वह गोल्ड स्कॉलर, 15 वर्ष की आयु में TEDx वक्ता और दो पेटेंट प्राप्त करने वाले नवप्रवर्तक हैं। उन्होंने बोइंग के लिए अत्याधुनिक रोबोटिक्स पर कार्य किया और प्रतिष्ठित नौकरी के प्रस्ताव प्राप्त किए। प्रद्युम्न ने एयरोस्पेस और प्रौद्योगिकी में उज्ज्वल भविष्य को छोड़कर बीएपीएस के संन्यासी जीवन में प्रवेश किया। स्वामिनारायण संप्रदाय में दीक्षा ग्रहण की और अब स्वामी केशवसंकल्पदास के रूप में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। निर्णय सच्ची संतोष की खोज का प्रतीक है, जो सांसारिक सफलता से परे है। अपना जीवन बीएपीएस के आध्यात्मिकता, सेवा और नैतिक उत्थान के वैश्विक मिशन को समर्पित कर दिया।

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