विदेशी कंपनियों की बढ़ती पकड़ के खिलाफ अब देश के व्यापारी संगठनों ने कमर कस ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “स्वदेशी अपनाओ” आह्वान को आगे बढ़ाते हुए व्यापारी समुदाय 15 और 16 सितम्बर को नागपुर में एक बड़ा राष्ट्रीय व्यापारी जुटान करने जा रहा है। इस सम्मेलन में 400 से ज्यादा व्यापारी नेता और उपभोक्ता संगठन शामिल होंगे।
विदेशी कंपनियों की बढ़ती पकड़ के खिलाफ अब देश के व्यापारी संगठनों ने कमर कस ली है। (फोटो सोर्स: टाइम्स नाउ नवभारत)
सम्मेलन के बाद पूरे देश में राष्ट्रीय स्वदेशी अभियान की शुरुआत होगी। इसका मकसद यह है कि हर गली-मोहल्ले, हर दुकान और हर बाजार में भारतीय वस्तुएं ही मुख्य पहचान बनें। व्यापारी संगठनों का कहना है कि अमेजन और वालमार्ट जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ ई-कॉमर्स के जरिए बाजार में दबदबा बना रही हैं, जिससे छोटे दुकानदार और रेहड़ी-पटरी वाले अस्तित्व संकट में आ गए हैं।
अमेरिकी टैरिफ वॉर हमारे लिए अवसर: प्रवीन खंडेलवाल
कैट (कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स) के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने प्रेस वार्ता में कहा, “अमेरिकी टैरिफ वॉर हमारे लिए अवसर है। व्यापारी वर्ग ठान चुका है कि विदेशी वस्तुओं की जगह अब हर जगह सिर्फ स्वदेशी सामान मिलेगा।”
फिलहाल देश का खुदरा कारोबार करीब 82 लाख करोड़ रुपये का है, और अनुमान है कि अगले 10 सालों में यह आंकड़ा 190 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। व्यापारी नेताओं का मानना है कि यदि उपभोक्ता स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दें, तो यह न सिर्फ छोटे व्यापारियों को बचाएगा बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा।
कैट अध्यक्ष बी. सी. भारतीय का कहना है, “देश के 3.5 करोड़ दुकानदार और रेहड़ी-पटरी वाले इस अभियान के असली स्तंभ हैं। नागपुर सम्मेलन से हम एक राष्ट्रीय रणनीति तय करेंगे, जो स्वदेशी आंदोलन को गांव-गांव तक पहुंचाएगी।”
प्रेस वार्ता में शामिल दीपक शर्मा ने कहा कि विदेशी कंपनियां सस्ते माल के जरिए भारतीय बाजार को कमजोर कर रही हैं। इससे न केवल छोटे उद्योग ठप हो रहे हैं, बल्कि रोजगार भी तेजी से घट रहा है। उन्होंने साफ कहा, “यह सिर्फ व्यापार का अभियान नहीं है, बल्कि आर्थिक स्वतंत्रता की नई लड़ाई है।”
नागपुर सम्मेलन से तय होने वाली रणनीति से देश में स्वदेशी की नई लहर उठने की संभावना है। अगर उपभोक्ता विदेशी वस्तुओं की बजाय भारतीय उत्पादों को अपनाएँ, तो यह छोटे व्यापारियों के लिए संजीवनी बनेगा और भारत को आत्मनिर्भरता की ओर ले जाएगा।
