MP News: मध्य प्रदेश के खंडवा जिले से एक बेहद दिलचस्प और अनोखा मामला सामने आया है, जिसने पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खंडवा कलेक्टरेट में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई के दौरान उस समय सब हैरान रह गए।
खंडवा में कुत्ते का मुखौटा पहन कलेक्टरेट पहुंचा शख्स।
जब एक व्यक्ति चेहरे पर कुत्ते का मुखौटा पहनकर अपने हाथों में आवेदन लिए पहुंच गया। खुद को 'डॉगेश भाई' बताने वाले इस व्यक्ति ने अनोखे अंदाज में नगर निगम के कामकाज पर तीखे प्रहार किए।
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40 लाख रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप
टाइम्स नाउ नवभारत के पत्रकार से बातचीत करते हुए इस नकाबपोश व्यक्ति ने बताया कि शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी को रोकने के लिए नसबंदी अभियान चलाया जाना था। लेकिन नगर निगम के अफसरों और कर्मचारियों ने कागजों पर काम दिखाकर 40 लाख रुपये से अधिक का घोटाला कर दिया।
उसने आरोप लगाया कि काम न होने की वजह से सड़कों पर कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। भोजन की कमी के कारण जब भूखे कुत्ते राहगीरों को काटने दौड़ते हैं, तो प्रशासन उल्टा बेजुबानों पर ही अत्याचार करता है और उन्हें मारता-भगाता है।
बॉलीवुड पर भी जताया ऐतराज
बातचीत के दौरान 'डॉगेश भाई' का दर्द सिर्फ भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं रहा। उसने समाज और फिल्मों में इस्तेमाल होने वाली भाषा पर भी ऐतराज जताया। सुपरहिट फिल्म 'शोले' के चर्चित डायलॉग 'बसंती, इन कुत्तों के सामने मत नाचना' का जिक्र करते हुए उसने कहा कि वफादार और ईमानदार प्राणियों को इस तरह नीचा दिखाना गलत है। जब भी कोई किसी को गाली देता है, तो सबसे पहले बेजुबान जानवरों का ही नाम इस्तेमाल करता है, जिससे उन्हें गहरा दुख पहुंचता है।
पहचान छिपाने की बताई वजह
जब रिपोर्टर ने उससे नाम पूछा, तो उसने अपनी पहचान उजागर करने से साफ़ इनकार कर दिया। उसका कहना था कि आजकल जो भी सच बोलता है या बेईमानी के खिलाफ आवाज उठाता है, उसे और उसके परिवार को निशाना बनाया जाता है। इसी डर से उसने अपनी पहचान गुप्त रखी है।
यह अनूठा प्रदर्शन स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि इस अनोखी गुहार के बाद प्रशासन नगर निगम के इस कथित घोटाले पर क्या कार्रवाई करता है।
