Indore Lokayukta Raid News: मध्य प्रदेश के इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार के बड़े खेल का पर्दाफाश किया है। लोकायुक्त पुलिस द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल (Indore corruption raid 2026) के इंदौर स्थित आवास, जिम और अन्य ठिकानों पर की गई छापेमार कार्रवाई में बड़ी मात्रा में संपत्ति का खुलासा हुआ है। लोकायुक्त निरीक्षक आशुतोष मिठास ने बताया कि कार्रवाई के दौरान एक बैंक लॉकर खोला गया, जिसमें 24 लाख 76 हजार 630 रुपये मूल्य के स्वर्ण एवं रजत आभूषण बरामद हुए, जिन्हें जब्त कर लिया गया है। जांच में यह भी सामने आया कि उनके पुत्रों द्वारा संचालित डिपार्टमेंटल स्टोर में 35 लाख 73 हजार 218 रुपये का सामान मिला।
महिला बाल विकास अधिकारी के घर मिले 10 करोड़ से ज्यादा
बैंक लॉकर और घर से मिला कुबेर का खजाना
वहीं उनके आवास से 38 लाख 48 हजार 530 रुपये मूल्य का घरेलू सामान और जिम में स्थापित उपकरणों की कीमत 2 लाख 71 हजार 10 रुपये आंकी गई है। इसके अलावा घर से 4 लाख 79 हजार 294 रुपये मूल्य के आभूषण और नकदी भी बरामद हुई है। घर, जिम और अन्य स्थानों पर मिली चल संपत्तियों की कुल कीमत 1 करोड़ 6 लाख 98 हजार रुपये से अधिक आंकी गई है। लोकायुक्त जांच में अब तक कंडवाल और उनके परिवार के नाम पर कई अचल संपत्तियां भी सामने आई हैं। इनमें स्कीम नंबर-103 में स्थित चार मंजिला व्यावसायिक भवन, स्कीम नंबर-140 में दो आवासीय भूखंड, ग्राम टिगरिया-बादशाह में करीब ढाई हेक्टेयर कृषि भूमि तथा ग्राम बैजलपुर, सोमलिया और मनेरी में स्थित अन्य भूमि शामिल हैं।
परिवार के नाम पर खरीदीं 14 बेशकीमती संपत्तियां
भारतीय ओवरसीज बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया सहित अन्य बैंकों में संचालित खातों की भी जांच की जा रही है। साथ ही बीमा और निवेश संबंधी दस्तावेजों की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि कंडवाल ने अपने परिवार के सदस्यों, जिनमें पत्नी, दोनों पुत्र और पुत्रवधुएं शामिल हैं, के नाम पर कुल 14 संपत्तियां अर्जित की हैं। इनमें से कुछ संपत्तियां दानपत्र और गिफ्ट डीड के माध्यम से हस्तांतरित की गई हैं, जिनकी भी जांच की जा रही है।
वर्तमान में लक्ष्मी नारायण कंडवाल महिला एवं बाल विकास विभाग में संयुक्त संचालक के पद पर इंदौर में पदस्थ हैं। इससे पहले वे झाबुआ, रतलाम, नीमच, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, शहडोल और उमरिया जिलों में भी पदस्थ रह चुके हैं। लोकायुक्त का कहना है कि विभागीय अभिलेखों और अन्य दस्तावेजों की जांच अभी जारी है, जिसके बाद संपत्तियों का अंतिम मूल्यांकन और विस्तृत प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा।
