ग्वालियर : मध्य प्रदेश के ग्वालियर में साइबर ठगी का एक बेहद गंभीर और चौका देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 70 वर्षीय वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) को क्रिप्टो करेंसी में निवेश का झांसा देकर 21 करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगा दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्टेट साइबर सेल ने जांच शुरू कर दी है।
पीड़ित सीए अशोक विजयवर्गीय (फोटो-ट्विटर)
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित सीए अशोक विजयवर्गीय, जो ग्वालियर के रोशनी घर क्षेत्र के निवासी हैं, ने जुलाई की शुरुआत में खुद को ठगा हुआ महसूस किया। उन्होंने 10 जुलाई को स्टेट साइबर सेल कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस को दी गई जानकारी के अनुसार, दिसंबर 2025 में पीड़ित की मुलाकात 'दिव्या सिंह' नाम की एक महिला से हुई, जिसने खुद को बेंगलुरु का बताया। उसने सीए को यूएसडीटी (USDT) क्रिप्टो करेंसी ट्रेडिंग में निवेश के लिए राजी कर लिया।
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ठगों ने बहुत ही चालाकी से पीड़ित का भरोसा जीता। शुरुआत में सीए ने 1 लाख रुपये का निवेश किया, जिस पर उन्हें 1.84 लाख रुपये का रिटर्न मिला। इस छोटे से लाभ ने पीड़ित को आश्वस्त कर दिया, जिसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे 10 से 12 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश कर दिया। ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर मुनाफा 30 करोड़ रुपये तक दिखाया गया, लेकिन जब पीड़ित ने अपनी रकम निकालने की कोशिश की, तो ठगों ने असली खेल शुरू कर दिया।
टैक्स के नाम पर ऐंठी बड़ी रकम
पैसा निकालने के बदले में ठगों ने टैक्स का बहाना बनाकर 11 करोड़ रुपये की मांग की। पीड़ित ने भरोसा करते हुए इसमें से 5.5 करोड़ रुपये जमा कर दिए। बाकी रकम खुद महिला द्वारा भरने का नाटक किया गया। कुल मिलाकर, जुलाई 2026 तक पीड़ित से 21 करोड़ रुपये ठगे जा चुके थे।
12 हजार बैंक खातों का जाल
स्टेट साइबर सेल के डीएसपी संजीव नयन शर्मा ने बताया कि यह एक अंतरराज्यीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय गिरोह है। जांच में सामने आया है कि ठगों ने मनी ट्रेल को छुपाने के लिए एक जटिल जाल बुना था। पहली लेयर में 77 खातों में 106 ट्रांजेक्शन हुए, दूसरी लेयर में 700 खाते और तीसरी लेयर में लगभग 12,000 बैंक खातों का उपयोग किया गया। यह नेटवर्क म्यांमार, कंबोडिया और थाईलैंड जैसे देशों से संचालित हो रहा है।
साइबर पुलिस ने अब तक 2 करोड़ रुपये फ्रीज कर लिए हैं और उन बैंक खाताधारकों की जानकारी जुटाई जा रही है जिनका उपयोग ठगी के लिए किया गया। पुलिस का मानना है कि ठग अक्सर गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें इस काले कारोबार में इस्तेमाल करते हैं। फिलहाल मामले की गहन जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों को पकड़ने के लिए टीमें रवाना की जाएंगी।
