Chita Andolan: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना (KBLP) से प्रभावित आदिवासी परिवार पिछले कई दिनों से अपने अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। बराना नदी के पुल के नीचे चल रहे इस विरोध प्रदर्शन को प्रदर्शनकारियों ने 'चिता आंदोलन' का नाम दिया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
'चिता आंदोलन' के दौरान प्रभावित परिवार (फोटो- ANI)
प्रशासन ने नहीं पूरा किया अपना वादा
प्रदर्शन में शामिल एक आदिवासी ने बताया कि यह आंदोलन लगातार नौवें दिन भी जारी है। उनका आरोप है कि इससे पहले भी उन्होंने 12 दिनों तक इसी तरह का आंदोलन किया था, जिसके दौरान प्रशासन ने उनकी मांगों पर विचार करने, कानून के अनुसार पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने और समस्याओं का समाधान करने का भरोसा दिया था। हालांकि, उनका कहना है कि प्रशासन ने अपने किसी भी वादे को पूरा नहीं किया, जिसके चलते उन्हें दोबारा आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
केन-बेतवा परियोजना को लेकर हो खुली चर्चा
प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि केन-बेतवा परियोजना को लेकर खुली चर्चा हो, परियोजना में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की जांच कराई जाए तथा जिन लोगों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है या जिन्हें पात्र होने के बावजूद सूची से बाहर रखा गया है, उन्हें नियमों के अनुसार उचित मुआवजा दिया जाए।
कई परिवारों को नहीं मिला मुआवजा
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि कई परिवारों को बिना मुआवजा दिए ही विस्थापित किया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रशासन उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है, इसलिए वे पिछले नौ दिनों से बराना पुल के नीचे धरने पर बैठे हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी वे बेतवा नहर में आंदोलन कर चुके हैं, लेकिन उस समय प्रशासन ने आश्वासन देकर आंदोलन समाप्त करा दिया था, जबकि बाद में कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर इस बार भी उनकी मांगों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया तो वे अपनी जान दे देंगे पर पीछे नहीं हटेंगे। कुल मिलाकर उनका कहना है कि वे झूठे आश्वासनों के आगे झुकने वाले नहीं हैं और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
क्या है चिता आंदोलन?
बता दें कि चिता आंदोलन मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों में आदिवासी और स्थानीय समुदायों द्वारा किया जा रहा एक अनूठा और तीव्र विरोध प्रदर्शन है. यह मुख्य रूप से केन-बेतवा लिंक परियोजना (KBLP) और अन्य विकास परियोजनाओं (जैसे मझगांव और एनटीपीसी) के कारण विस्थापन का सामना कर रहे परिवारों द्वारा चलाया जा रहा है। प्रदर्शनकारी जमीन पर प्रतीकात्मक चिताओं पर लेटकर या शव की मुद्रा में लेटकर अपना विरोध दर्ज करते हैं।
