मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में 'जीरो पावर्टी अभियान' को एक मिशन मोड में संचालित करने का संकल्प लिया है। राज्य का कोई भी गरीब परिवार सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे, यही अभियान का लक्ष्य है। पहले चरण में सात प्रमुख योजनाओं—राशन कार्ड, दिव्यांग पेंशन, विधवा पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन, पीएम किसान सम्मान निधि, पीएम आवास योजना और आयुष्मान भारत योजना - को केंद्र में रखकर पात्र परिवारों को लाभ पहुंचाया गया। इसका दूसरा चरण और भी व्यापक होगा। इसमें प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, जलजीवन मिशन, इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन, शिक्षा और मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना पर खासतौर पर ध्यान दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फोटो - PTI)
सम्मानजनक जीवन ही लक्ष्य
सीएम योगी आदित्यनाथ का विजन है कि 'जीरो पावर्टी' सिर्फ एक सरकारी योजना बनकर न रहे, बल्कि 'सामाजिक संकल्प' बने। उनका कहना है कि यह सिर्फ सहायता देने की पहल नहीं, बल्कि 'गरीबी के चक्र को स्थायी रूप से तोड़ने' का मॉडल है। इस मिशन का उद्देश्य राज्य को गरीबीमुक्त बनाना और हर गरीब परिवार को 'सम्मानजनक जीवन' देना है। यह अभियान 'योगी मॉडल ऑफ डेवलपमेंट' की मिसाल है, जहां विकास सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि हर नागरिकों के जीवन स्तर में भी दिखता है।
खुशहाल बचपन बनेगा जीवन का आधार
अभियान के दूसरे चरण में 'अटल आवासीय योजना' को शामिल किया गया है। इसके तहत निराश्रित बच्चों को सुरक्षित आवासीय शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। 'मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना' से गरीब परिवारों की बेटियों को आर्थिक व सामाजिक सशक्तिकरण के अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही, सभी अनाथ बच्चों को बाल सेवा योजना में शामिल करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
ऊर्जा और जल की जरूरतें हो रहीं पूरी
महिलाओं को सुरक्षित ईंधन उपलब्ध कराने के लिए उज्ज्वला योजना को तेजी से लागू किया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर घर में 'सैनिटरी टॉयलेट्स', जलजीवन मिशन से 'पेयजल की उपलब्धता', और बिजली कनेक्शन योजना से 'नियमित बिजली सप्लाई' सुनिश्चित की जा रही है।
गरीबी की पहचान और स्थायी सुधार की कोशिशें
'जीरो पावर्टी' अभियान के तहत ऐसे परिवारों की पहचान की जा रही है, जिनके पास न कृषि भूमि है, न पक्का मकान और जिनके सदस्य बुजुर्ग, निराश्रित, अनाथ या दिव्यांग हैं। युवाओं को शिक्षा और रोजगार से जोड़ने के लिए 'डेमोग्रॉफी, असेट ऑनरशिप और एजुकेशन-एंप्लॉयबिलिट' के तीन स्तंभों पर आधारित मॉडल अपनाया गया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि 'जिला से ग्राम स्तर तक सभी अधिकारी' 100 फीसद कवरेज सुनिश्चित करें, ताकि 'गरीबीमुक्त उत्तर प्रदेश' का सपना साकार हो सके।
