सरकारी योजनाओं में बंदरबांट और घोटाले की कई कहानियां आपने सुनी और पढ़ी होंगी। इन घोटालों और बंदरबांट में सरकारी अधिकारियों और मंत्रियों के शामिल होने की भी तमाम खबरें हम सब पढ़ते-सुनते रहते हैं। घोटाले चुनावी मुद्दे भी बनते हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में छोटे-मोटे अधिकारियों को सजा मिल जाती है। लेकिन बड़े अधिकारी और मंत्री अक्सर सजा से बच जाते हैं। उत्तर प्रदेश में एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां स्वयं मंत्री ने ही घोटाले का भंडाफोड़ कर दिया और जांच के आदेश भी दे दिए। मंत्री के काम की तारीफ भी हो रही है।
यूपी में मंत्री ने किया घोटाले का खुलासा
दरअसल उत्तर प्रदेश के मथुरा में पर्यटन विकास योजनाओं में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। यहां पर केंद्र सरकार की तरफ से पर्यटन विकास के लिए 5.5 करोड़ के कार्य करवाए गए थे। अधिकारियों ने मंत्री को अंधेरे में रखकर उन कार्यों के लिए भी नए सिरे से एस्टीमेट बना दिए। बात यहीं तक सीमित नहीं रही, ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने बार-बार डीपीआर की धनराशि भी बढ़ाई। पहले की डीपीआर में जिस कार्य के लिए 25 करोड़ खर्च का अनुमान था और उसे बाद में बढ़ाकर 38 और 48 करोड़ कर दिया गया।
मंगलवार 4 फरवरी को उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने जब विभागीय योजनाओं की समीक्षा की तो उन्हें अधिकारियों के इस खेल का पता चला। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री के सामने अधिकारियों के इस घोटाले का खुलासा हो चुका था। मंत्री जयवीर सिंह ने इस पर नाराजगी जताई और इसे घोटाला करार दिया। यही नहीं, उन्होंने इस मामले में प्रमुख सचिव को टीम बनाकर जांच के भी आदेश दे दिए।
दरअसल मंत्री जयवीर सिंह मंगलवार को राजधानी लखनऊ के पर्यटन भवन में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय की योजनाओं की समीक्षा कर रहे थे। केंद्र सरकार की ओर से कराई गई 5.5 करोड़ की परियोजनाओं को भी एस्टीमेट में शामिल करने पर वह भड़क गए और तुरंत इस मामले में जांच के आदेश दे दिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि निर्माण के लिए प्रस्तावित परियोजनाओं की डीपीआर और अन्य वित्तीय मामलों की पूरी जांच की जाएगी और उसके बाद ही काम शुरू होगा।
