Kolkata Durga Pandal Stampede : उत्तरी कोलकाता में 250 से अधिक वर्षों से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है। शनिवार की शाम होते-होते लोग विभिन्न पंडालों में पहुंच रहे थे। इसी बीच चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल से एक दुखद घटना सामने आई। करीब 7 बजकर 40 मिनट पर भारी भीड़ के कारण भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस दर्दनाक हादसे में करीब 17 लोगों की मौत की बात सामने आ रही है और 25 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। सभी घायलों को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। मुख्यमंत्री समेत बड़े आलाधिकारी हालात का जायजा ले रहे हैं। बताया गया कि बारिश के दौरान पंडाल में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे थे, जिसके चलते यह घटना हुई। लेकिन सवाल यह है कि आखिर पंडाल के भीतर ऐसा क्या हुआ कि लोग खुद को भीड़ के बीच फंसा हुआ पाने लगे? चश्मदीदों की आपबीती इस हादसे की भयावहता बयां करती है।
कोलकाता में दुर्गा पूजा सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आस्था और परंपरा का हिस्सा है। शनिवार की शाम भी हजारों लोग इसी आस्था के साथ पंडालों में दर्शन के लिए पहुंचे, लेकिन सारदा पार्क के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में अचानक मची अफरा-तफरी ने खुशियों के माहौल को चीख-पुकार में बदल दिया। बाहर निकलने की होड़ में लोग एक-दूसरे के ऊपर आ गए। इससे पहले लोग कुछ समझ पाते अफरा-तफरी मच गई और चीख पुकारें उठने लगी। भगदड़ के बाद कोलकाता में कई पूजा पंडाल बंद कर दिए गए हैं, जिनमें ताला प्रैटोय, चेतला अग्रणी और अलीपुर सर्बोजनिन में लाइट एंड साउंड शो बंद किए गए हैं। इसके अतिरिक्त ऐहतियातन कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। गृहमंत्री अमित शाह कोलकाता दौरे पर हैं, उन्होंने भी सभी कार्यक्रम रद्द करते हुए हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
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प्रवेश द्वार बेहद संकरा
एक प्रत्यक्षदर्शी ने व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पंडाल का प्रवेश द्वार बेहद संकरा था और बाहर निकलने का रास्ता भी काफी छोटा था। इलाके में रोशनी की भी व्यवस्था नहीं थी। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि उनकी बेटी और नातिन अस्पताल में भर्ती हैं।
सूचना मिलते ही कोलकाता पुलिस, दमकल विभाग, आपदा प्रबंधन टीम और मेडिकल टीम के साथ एंबुलेंस को मौके पर भेजा गया। सभी घायलों को निकालकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया गया। अब तक मिली जानकारी के अनुसार, करीब 35 लोगों को अस्पताल ले जाया गया है। घटना के बाद पंडाल को श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया गया है। घायलों की स्थिति और घटना से जुड़ी अन्य जानकारी का इंतजार है।पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री सरदवत मुखर्जी और वरिष्ठ अधिकारी तुरंत अस्पताल पहुंचे। आपदा प्रबंधन कर्मी मौके पर पहुंच गए हैं।
देशप्रिय पार्क भगदड़ (19 अक्टूबर 2015)
मीडिया खबरों के हवाले साल 2015 में देशप्रिय पार्क में दुनिया की सबसे ऊंची (88 फीट) दुर्गा प्रतिमा बनाई गई थी। पंचमी के दिन ही इस विशालकाय प्रतिमा को देखने के लिए लाखों की संख्या में एक साथ पार्क घुस गए और भीड़ बेकाबू होने लगी। प्रशासन इससे पहले कुछ समझ पाता भी अनियंत्रित हो गई और भगदड़ जैसे हालात बन गए और लोग एक दूसरे के ऊपर गिरने लगे। इस हादसे में करीब 11 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। ये क्राउड मैनेजमेंट की विफलताओं में से एक बताया गया। गनीमत थी कि किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।
भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार में पहला हादसा
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा की यह पहली सरकार है और सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री के तौर पर राज्य की कमान संभाल रहे हैं। ऐसे में भाजपा सरकार के कार्यकाल की यह पहली दुर्गा पूजा है। राज्य सरकार ने करीब 12400 नई दुर्गा पूजाओं को मंजूरी दे रखी है और सभी समितियों को एक-एक लाख रुपये का अनुदान भी दिया गया है। तमाम तैयारियों के बीच सरकार के क्राउड मैनेजमेंट पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। इस तरह का बड़ा हादसा प्रशासन की विफलता की ओर इशारा करता है।
