Uttarakhand Tunnels: भारत का उत्तराखंड राज्य जितनी अपनी खूबसूरत वादियों के लिए जाना जाता है, उतना ही यह अपने दुर्गम रास्तों और पहाड़ियों के लिए भी विख्यात है। ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा यह राज्य प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का भी सामना करता है। यहां कई इलाके ऐसे हैं, जहां ऊंचे पहाड़, गहरी घाटियां और घुमावदार सड़कें आवागमन को चुनौतीपूर्ण बना देती हैं।
उत्तराखंड की इन सुरंगों ने बदली पहाड़ों की तस्वीर (AI फोटो)
इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उत्तराखंड में सड़क और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार बड़े स्तर पर निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। इसी दिशा में उत्तराखंड में कई महत्वपूर्ण सुरंगों का निर्माण किया गया है, जिन्होंने पहाड़ी इलाकों में आवागमन को काफी आसान बना दिया है। इन सुरंगों के जरिए पहाड़ों के बीच लंबी दूरी को कम समय में तय किया जा सकता है, जिससे घंटों का सफर कुछ ही मिनटों में पूरा होने लगा है। वहीं, कई हाइड्रोइलेक्ट्रिसिटी प्रोजेक्ट्स के लिए भी अत्याधुनिक सुरंगें बनाई गई हैं। ऐसे में आइए एक-एक करके जानते हैं इनके बारे में।
सिल्कयारा-बरकोट सुरंग
सिल्कयारा-बरकोट सुरंग उत्तराखंड की प्रमुख सुरंग परियोजनाओं में शामिल है। इसकी लंबाई करीब 4.53 किलोमीटर है और यह ऑल वेदर चारधाम रोड परियोजना (NH-94) कॉरिडोर का हिस्सा है। यह सुरंग धरासू और यमुनोत्री के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है। इसके पूरा होने के बाद उत्तरकाशी से यमुनोत्री तक की सड़क दूरी करीब 26 किलोमीटर तक कम होने की उम्मीद है, जिससे यात्रियों का समय भी बचेगा। यह सुरंग नवंबर 2023 में एक बड़े हादसे के चलते पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गई थी। निर्माण के दौरान सुरंग का एक हिस्सा ढह जाने से 41 श्रमिक अंदर फंस गए थे। उन्हें बाहर निकालने के लिए करीब 17 दिनों तक लगातार रेस्क्यू अभियान चलाया गया, जिसके बाद सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
चंबा सुरंग
यह सुरंग करीब 440 मीटर लंबी है और इसका निर्माण सीमा सड़क संगठन (BRO) ने ऋषिकेश-धरासू मार्ग यानी NH-94 पर किया है। इस सुरंग के शुरू होने से चंबा कस्बे के बीच से गुजरने वाले भारी यातायात का दबाव कम हुआ है। इसका सीधा लाभ चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को मिला है, क्योंकि पहले यहां अक्सर जाम की स्थिति बन जाती थी। सुरंग के कारण वाहनों की आवाजाही अधिक सुगम हुई है और यात्रा के समय में भी कमी आई है।
डाट काली सुरंग
करीब 340 मीटर लंबी यह सुरंग देहरादून और दिल्ली के बीच सड़क संपर्क का एक महत्वपूर्ण मार्ग मानी जाती है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे परियोजना के तहत इस क्षेत्र में लगभग 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर और आधुनिक सुरंगों का भी निर्माण किया गया है, जिससे यातायात सुगम होने के साथ वन्यजीव संरक्षण को भी ध्यान में रखा गया है।
तपोवन-विष्णुगाड परियोजना सुरंग, चमोली
चमोली में धौलीगंगा नदी पर एनटीपीसी की तपोवन-विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना के अंतर्गत करीब 12 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण यहां किया गया है।
टिहरी बांध की सुरंग, टिहरी
भागीरथी नदी के पानी को विद्युत उत्पादन वाली टर्बाइन तक पहुंचाने के उद्देश्य से यहां अंडरग्राउंड डायवर्जन सुरंग का निर्माण किया गया है।
मनेरी भाली परियोजना सुरंग, उत्तरकाशी
यह जल सुरंग भागीरथी नदी के पानी को तिलोथ पावर हाउस तक पहुंचाने के लिए बनाई गई है, जहां इस जल का इस्तेमाल बिजली उत्पादन में किया जाता है।
प्रस्तावित और निर्माणाधीन सुरंगें
- मसूरी की मॉल रोड पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव और जाम की समस्या को कम करने के लिए करीब 2.74 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाने का प्रस्ताव है।
- वहीं, वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) तक सेना की आवाजाही को सुगम बनाने के उद्देश्य से बीआरओ (BRO) कुमाऊं क्षेत्र में कई छोटी सुरंगों का निर्माण कर रहा है।
