Kal Ka Mausam: मानसून की नई चाल से बदलेगा मौसम का मिजाज, पहाड़ों से मैदानों तक बरसेंगे बादल; 4 सितंबर तक जारी रहेगा सिलसिला

Kal Ka Mausam 30 August 2026, कल का मौसम कैसा रहेगा: मानसून सिस्टम में बदलाव के चलते देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिजाज बदलता नजर आ रहा है। दिल्ली-यूपी से लेकर बिहार, मध्य भारत और पूर्वोत्तर राज्यों तक बारिश और गरज-चमक का असर देखने को मिलेगा, जबकि राजस्थान में मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी रहेगी। पहाड़ी क्षेत्रों में भारी वर्षा के साथ दक्षिणी राज्यों में भी अगले कुछ दिनों तक बारिश और तेज हवाओं की गतिविधियां बनी रह सकती हैं।

Kal Ka Mausam 30 August 2026: देश के कई राज्यों में मानसून की गतिविधियां अलग-अलग रूप में देखने को मिल रही हैं। कहीं भारी बारिश का दौर जारी है तो कुछ इलाकों में मानसून कमजोर पड़ने से मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश में मौसम में बदलाव के बीच बारिश की संभावना बनी हुई है, जबकि बिहार समेत मध्य और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में वर्षा का दौर जारी रह सकता है। वहीं, पहाड़ी राज्यों और दक्षिण भारत में भी अगले कुछ दिनों तक बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

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कल का मौसम कैसा रहेगा?

बात अगर वेदर सिस्टम की करें तो मानसून ट्रफ का पश्चिमी सिरा इस समय अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर बना हुआ है, जबकि इसका पूर्वी सिरा समुद्र तल पर अपनी सामान्य स्थिति के आसपास मौजूद है। उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल तथा उत्तर ओडिशा के तटीय इलाकों में बने चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) के प्रभाव से इसी क्षेत्र में कम दबाव का क्षेत्र विकसित हुआ है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 48 घंटों के दौरान यह सिस्टम और मजबूत हो सकता है तथा उत्तर ओडिशा और गंगीय पश्चिम बंगाल के हिस्सों से होते हुए पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। वहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के इलाकों में बना पिछला निम्न दबाव क्षेत्र अब कमजोर पड़ गया है। हालांकि, इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण निचले क्षोभमंडलीय स्तर पर अभी भी पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय है। इसके अलावा, पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) अब उत्तर पाकिस्तान और उससे सटे उत्तर पंजाब के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण के रूप में मौजूद है। यह परिसंचरण निचले से लेकर मध्य क्षोभमंडलीय स्तर तक देखा जा रहा है।

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