Jamia Millia Islamia Protest: जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ बहाल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र शनिवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बीच परिसर में दाखिल हुए और उनमें से कई छात्रों को हिरासत में ले लिया गया। छात्र संगठनों ने दावा किया कि बाद में सभी को रिहा कर दिया गया। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन आइसा के अनुसार, ये घटनाक्रम शनिवार तड़के भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को कथित तौर पर जबरन परिसर से हटाए जाने और इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उन्हें निलंबित या निष्कासित किए जाने के कुछ घंटे बाद हुए। छात्र 2006 में भंग किए गए छात्र संघ को बहाल करने की मांग को लेकर हड़ताल पर थे।
छात्र संगठन AISA का बड़ा आरोप
आइसा ने आरोप लगाया कि मुख्य प्रॉक्टर असद मलिक के निर्देश पर सुबह करीब साढ़े पांच बजे छात्रों को परिसर से हटाया गया। संगठन का दावा है कि इस दौरान परिसर की लाइट बंद कर दी गई और छात्रों के साथ धक्का-मुक्की की गई तथा घसीटकर बाहर निकाला गया। इसके बाद उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया गया। छात्र संगठन ने कहा कि हिरासत में लिए गए सभी छात्रों को रिहा कर दिया गया है। उसने मलिक के इस्तीफे की मांग की और छात्र संघ बहाल करने और चुनाव की घोषणा करने की भी मांग की। आइसा ने कथित तौर पर बल प्रयोग किए जाने की स्वतंत्र जांच कराने और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों तथा सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की। बाद में छात्र विश्वविद्यालय के बाहर एकत्र हुए।
छात्र संघ बहाली को लेकर प्रदर्शन
छात्र प्रतिनिधियों ने दावा किया कि कई घंटे तक बंद रहे द्वार खुलने के बाद उनमें से कुछ छात्र परिसर में दाखिल हो गए। उनके अनुसार, दिल्ली पुलिस के जवान बड़ी संख्या में तैनात थे और बाहर एकत्र लोगों को तितर-बितर करने की कोशिशों के बीच हिरासत में लेने की कार्रवाई शुरू हुई। छात्र प्रतिनिधियों के मुताबिक, हिरासत में लिए गए छात्रों को जामिया नगर थाने ले जाया गया। बाद में उन्होंने बताया कि सभी छात्रों को रिहा कर दिया गया है। विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने कहा कि जामिया में पहले से ही एक व्यवस्था है, जिसके तहत प्रत्येक विभाग और केंद्र के तीन निर्वाचित छात्र प्रतिनिधि विद्यार्थियों की समस्याएं और चिंताएं प्रशासन के सामने रख सकते हैं। अधिकारी ने कहा कि प्रशासन छात्र संघ की मांग के खिलाफ नहीं है, लेकिन दावा किया कि प्रक्रिया शुरू करने के लिए कोई ज्ञापन नहीं सौंपा गया है।
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प्रॉक्टर असद मलिक के इस्तीफे की मांग
अधिकारी ने कहा, अगर कोई ज्ञापन ही नहीं दिया गया है, तो हम प्रक्रिया कैसे शुरू कर सकते हैं? कोई समिति गठित नहीं की जा सकती। अधिकारी ने बताया कि एक छात्र को एक साल के लिए निष्कासित कर परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया गया है। हालांकि, इस फैसले के खिलाफ अपील करने का प्रावधान है। अधिकारी ने कहा कि दो अन्य छात्रों को छह महीने के लिए परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया गया है। उनके मामलों की समीक्षा अनुशासन समिति करेगी। विश्वविद्यालय की अनुशासनात्मक कार्रवाई की आइसा ने आलोचना की है। संगठन ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ बातचीत करने के बजाय उनके खिलाफ दंडात्मक कदम उठाने का रास्ता चुना।
