नवभारत नवनिर्माण मंच: 'एक मॉडल स्टेट बनकर उभरेगा राजस्थान', जानें मातृ-शिशु दर में कितना हुआ सुधार

  • Written by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Sep 27, 2023, 03:22 PM IST

Navbharat Navnirman Manch: राजस्थान में मातृ-शिशु दर में बेहतर सुधार देखे गए हैं। अशोक गहलोत की सरकार ने पिछले 5 वर्षों में क्या कुछ किया, नवभारत नवनिर्माण मंच पर स्वास्थ्य मंत्रालय (प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य) के डायरेक्टर डॉ. लोकेश चतुर्वेदी और अन्य अधिकारियों ने इसके बारे में बताया, नीचे पढ़ें।

Navbharat Navnirman Manch: देश भर में राजस्थान की स्वास्थ्य सेवा की चर्चा हो रही है। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं लोगों को मुहैया कराने के लिए अशोक गहलोत की सरकार ने पिछले 5 वर्षों में क्या कुछ किया? खासकर राज्य में मातृ-शिशु स्वास्थ्य कितना सुधार हुआ और क्या-क्या बदवाल हुए, इसे लेकर टाइम्स नाउ नवभारत के समिट 'नवभारत नवनिर्माण मंच' पर खास चर्चा हुई। स्वास्थ्य मंत्रालय (प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य) के डायरेक्टर डॉ. लोकेश चतुर्वेदी, मातृ स्वास्थ्य के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. तरुण चौधरी और बाल स्वास्थ्य के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. प्रदीप कुमार चौधरी ने महिलाओं एवं नवजात बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी सरकार की योजनाओं और कदमों के बारे में जानकारी साझा की।

Rajasthan Navbharat Navnirman Manch

राजस्थान में मातृ-शिशु स्वास्थ्य में होता सुधार।

राजस्थान के हर इलाकों में योजनाएं पहुंचाना कितना चैलेंजिग?

कहते हैं कि खुशहाल परिवार की नींव रखने के लिए घर की महिला का स्वस्थ्य होना बेहद जरूरी है। राजस्थान के हर इलाकों तक शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं और सरकारी सुविधाएं पहुंचाना सबसे बड़ा चैलेंज है। इसी को लेकर हमने डॉ. लोकेश चतुर्वेदी से ये सवाल पूछा कि आखिर सरकार राजस्थान के उन इलाकों में लोगों को लाभ कैसे पहुंचाती है, जहां पहुंचना भी काफी मुश्किल है। इस सवाल के जवाब में डॉ. लोकेश ने बताया कि वाकई ये सच है कि राजस्थान हर तरह के इलाके हैं, इसमें सबसे ज्यादा चैलेंजिंग रेगिस्तानी इलाकों में पहुंचना है। राजस्थान में शिशु स्वास्थ्य योजनाओं को उसको ड्रिमोट (रेगिस्तानी) एरिया तक पहुंचाने के लिए हमने ममता एक्सप्रेस लागू किया। ममता एक्सप्रेस बेसिकली एक हाइब्रिड मॉडल है, जिसमें सुबह 6 घंटे तक शिशु स्वास्थ्य इम्युनाइजेशन के लिए काम करती है और उन एरिया में जाती है, जहां पर किसी को पहुंचने में परेशानियां होती हैं। दूसरी जो हमारी सेवाएं हैं। उसमें हमारी एमएमयू, एमएमवी भी हैं जो इसी तरह की चीजें कर रही है। इसके अलावा हमारी जो राज्य में 500 से 600 तक जननी एक्सप्रेस है, जो हमारी प्रसूताओं और शिशुओं को इमरजेंसी स्टेज पर घर से लेकर अस्पताल तक और वापस अस्पताल से लेकर घर तक छोड़ने की सुविधा हम लोगों ने उपलब्ध कराई। ये जो हमने 100 ममता एक्सप्रेस साथ में चलाए हैं वो 6 घंटे चिकित्सा सेवा, अन्य सेवाओं के साथ बाद में बचे हुए टाइम में वो जननी एक्सप्रेस में परिवर्तित हो जाती है।

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