Hanuman Chalisa in Phad Chitra shaili : मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के अनन्य भक्त, बल बुद्धि के अधिष्ठाता हनुमान जी का प्राकट्योत्सव गुरुवार को धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर आपके सामने ला रहे हैं मेवाड़ की पारंपरिक चित्रकला फड़ पर प्राकृतिक रंगों से उकेरी हनुमान चालीसा। हनुमान जी की महिमा को तीन दोहे और 40 चौपाइयों में काल्पनिक चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है।
हर चौपाई के पूर्ण होने पर प्रभु श्रीराम का नाम भी उकेरा है। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त फड़ चित्रकार कल्याण जोशी ने यह पेंटिंग तैयार की है। भीलवाड़ा में सांगानेरी गेट निवासी जोशी ने बताया कि हाथ से तैयार कपड़े (केनवास) पर हनुमान चालीस उकेरी जाती है। इसमें घर पर तैयार प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग किया जाता है।
हनुमान जी के शरीर का रंग सिंदूरी है। कला के कद्रदान की मांग पर वे रीयल गोल्ड व रेड कलर में भी हनुमान चालीस उकेरते हैं। सबसे छोटी पेंटिंग दो फीट गुना तीन फीट को तैयार करने में कम से कम 20 दिन लगते हैं।
चित्रकार कल्याण कहते हैं कि सबसे बड़ी बात ये है कि वे हनुमान चालीसा को फड़ पर उकेरने का काम सोमवार,मंगलवार या शनिवार को ही आरंभ करते हैं, और पूर्ण मंगलवार या शनिवार को ही होता है। इसकी वजह बताते हैं- सोमवार रुद्रावतार तथा मंगल व शनि बालाजी का दिन है।
कुछ नया करने की ललक में जोशी ने सबसे पहले 1994 में हनुमान चालीसा को फड़ पर उकेरा था। इसके बाद तो निरंतर उकेरते जा रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों से फड़ पर हनुमान चालीसा की डिमांड बढ़ी है। देश के कई हिस्सों से ऑर्डर आ रहे हैं। लोग गिफ्ट में देने के साथ ही अपने घरों के ड्राइंग रूम में भी लगाते हैं। खासकर इंडियन एनआरआई में ज्यादा डिमांड है।
(भंवर पुष्पेंद्र
की रिपोर्ट)
