अमायरा सुसाइड केस में जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल पर बड़ी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की दो सदस्यीय जांच कमेटी ने स्कूल को मामले में गंभीर लापरवाही और नियमों के उल्लंघन का दोषी माना है। इसके बाद गुरुवार, 20 नवंबर को स्कूल को आधिकारिक नोटिस जारी किया गया।
प्रतीकात्मक फोटो (istock)
जांच रिपोर्ट के अनुसार, चौथी कक्षा में पढ़ने वाली 9 वर्षीय अमायरा लगातार बुलिंग और बदसलूकी की शिकायतें कर रही थी, लेकिन स्कूल प्रशासन और शिक्षकों ने इसे नज़रअंदाज़ किया। यह तथ्य जांच टीम के लिए सबसे चौंकाने वाला रहा। 12 नवंबर को CBSE टीम ने अमायरा के माता-पिता से मुलाकात की, जहां उन्होंने बताया कि बच्ची पिछले डेढ़ साल से लगातार मानसिक प्रताड़ना झेल रही थी।
“सबूतों के साथ छेड़छाड़ की आशंका”
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमायरा की मौत के बाद स्कूल में घटना स्थल को फोरेंसिक जांच से पहले साफ किया गया, जिससे सबूतों के साथ छेड़छाड़ की आशंका जताई गई है। कमेटी ने इसे एक गंभीर अपराध की श्रेणी में माना है।
“सुरक्षा मानकों और गाइडलाइंस का उल्लंघन”
सरप्राइज इंस्पेक्शन के दौरान CBSE टीम को स्कूल में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियां मिलीं। मॉनिटरिंग सिस्टम कमजोर पाया गया और कई राष्ट्रीय गाइडलाइंस का पालन नहीं होने की पुष्टि हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्कूल बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण देने में नाकाम रहा।
कड़ी कार्रवाई की तैयारी- सस्पेंशन से लेकर एफिलिएशन रद्द होने तक का खतरा
कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर CBSE ने स्कूल मैनेजमेंट से पूछा है कि एफिलिएशन बाय लॉज़ के चैप्टर 12 के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए? संभावित दंड में-
•चेतावनी
•आर्थिक जुर्माना
•एफिलिएशन का डाउनग्रेड
•एफिलिएशन का सस्पेंशन
•या पूर्ण रूप से एफिलिएशन रद्द करना शामिल है।
इस मामले में अब तक पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर भी कई सवाल उठ रहे हैं, जबकि पीड़ित परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है।
